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जब एक वायरस के कारण हुई थी 10 करोड़ से अधिक लोगों की मौत, चारों तरफ थी लाशें ही लाशें

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 February 2020, 10:55 IST

चीन के कोरोना वायरस के कारण पुरी दुनिया में खौफ बना हुआ है. इस वायरस के कारण अभी तक बस चीन में ही दिसंबर महीने के बाद से ही 1700 के अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं यह वायरस अभी तक कुल 20 से अधिक देशों में फैल चुका है. लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब किसी फ्लू या वायरस के कारण दुनिया में लोगों की इतने बड़े फैमाने पर जान गंवानी पड़ी हो. इतिहास में पीछे जाए तो साल 1918-1920 के बीच में पुरी दुनिया में एक फ्लू के कारण हाहकार मचा हुआ था. इस फ्लू के कारण 10 करोड़ से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. यह काफी बड़ा आंकड़ा था क्योंकि उस दौरान दुनिया की आबादी इतनी ज्यादा नहीं थी.

साल 1918 में एक भयानक इन्फ्लूएंजा वायरस का पूरी दुनिया में कहर था. इस वायरस का नाम था स्पेनिश फ्लू के कारण केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में 675,000 लोगों की जान गई थी. इतना ही नहीं साल 1918 के अक्टूबर महीने में इस स्पेनिश फ़्लू से लगभग 200,000 अमेरिकियों की मृत्यु हो गई था. उस दौरान इस फ्लू का इतना ज्यादा खौफ था कि लोगों के इक्ठा होने पर प्रतिबंध था, इतना ही नहीं लोगों को जनाजे और किसी का मौत का शोक के भी पाबंधी थी.

इस फ्लू के कारण सबसे भयावहता फिलाडेल्फिया में देखी गई थी, जहाँ महामारी के कारण प्रतिदिन 1,000 लोगों की मौत हुई थी. फिलाडेल्फिया के एक शहर के मुर्दाघर में केवल 36 लाशों को रखने की जगह थी लेकिन इस दौरान करीब 500 लाशें लाई गई थी जिसके कारण मुर्दा घर में काफी भीड़ हो गई थी. इसके लिए प्रशासन ने शहर में अस्थाई मुर्दाघरों का निर्माण किया जिसमें लाशे रखी गई थी. इस दौरान कई लोगों को एक साथ दी दफना जाया रहा था.

फिलाडेल्फिया और शिकागो सहित शहरों में सार्वजनिक अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. आयोवा में तो सार्वजनिक अंत्येष्टि और यहां तक कि ताबूतों को खोलने पर भी प्रतिबंध लगा दी गई थी. अपवाद के तौर पर सैनिकों की पहचान के लिए उनके दफनाने से पहले उनके परिजनों को ताबूत खोलने की अनुमति थी. लेकिन इसमें भी शर्त थी कि वो केवल कास्केट खोल सकते थे. इस दौरान वो अपने मुंह और नाक को नकाब से ढक लेते थे और शरीर को छूने से बचते थे.


1918 के स्पैनिश फ्लू महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक महामारी मारी जाता है. इस फ्लू के कारण दुनिया भर में अनुमानित 500 मिलियन लोगों को संक्रमित किया जो उस दौरान विश्व की आबादी का लगभग एक तिहाई थी. 1918 फ्लू पहली बार यह फ्लू यूरोप में फैला जिसके बाद यह तेजी से संयुक्त राज्य अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में फैला था. उस समय इस फ्लू का इलाज करने के लिए कोई प्रभावी दवाएं या टीके नहीं थे. नागरिकों को मास्क पहनने का आदेश दिया गया था, स्कूलों, थिएटरों और व्यवसायों को बंद कर दिया गया था और वायरस के घातक वैश्विक मार्च को समाप्त करने से पहले शवों को मशाफ्ट मॉर्गेज में ढेर कर दिया गया था.

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First published: 16 February 2020, 18:48 IST
 
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