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यहां मिला 3600 साल पुराना डिस्पोजल कप, शराब पीने के लिए किया जाता था इस्तेमाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 December 2019, 15:13 IST

3600 Year Old Disposable Cup : दुनियाभर में मिली प्राचीन काल (Ancient Era) की वस्तुओं से पता चलता है कि प्राचीन काल में भी इंसान आज के जैसे ही सामानों का प्रयोग किया करते थे. हालांकि इनके आकार बनाने के तरीके में कुछ बदलवा जरूरी है. ऐसा ही एक चीज को लंदन के एक संग्रहालय में रखा गया है. दरअसल, इस संग्रहालय में एक डिस्पोजल कप को रखा गया है.

जो आधुनिक काल (Mordern Era) में इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजल कपों (Diposable Cups) से अलग है. इस कप को 3600 साल पुराना बताया गया है. बिना हैंडल वाला ये डिस्पोजल कप चिकनी मिट्टी से बना हुआ है. संग्रहालय का दावा है कि मिनोअन सभ्यता के दौरान ग्रीस के क्रेते द्वीप पर चिकनी मिट्टी से बने कपों का इस्तेमाल होता रहा होगा. ऐसे कपों को एक बार इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता होगा.


संग्रहालय के मुताबिक, इस डिस्पोजल कप का निर्माण 1700 से लेकर 1600 ईसा पूर्व के बीच हुआ है. इन कपों का इस्तेमाल करने वाली मिनोअन सभ्यता 2700 से लेकर 1450 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में रही थी. वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि हजारों साल पहले मिट्टी के इन कपों का इस्तेमाल शराब पीने के लिए किया जाता था.

ब्रिटिश संग्रहालय की देखरेख करने वाली जुलिया फर्ले का कहना है कि उस समय मुख्य त्याहारों पर दौलतमंद लोग अपनी संपत्ति का दिखावा करने के लिए बड़ी-बड़ी दावतों का आयोजन करते थे, इन दावतों में मिट्टी के कपों का इस्तेमाल होता था. क्योंकि इन दावतों में बड़ी संख्या में लोग आते थे, हालांकि इन दावतों में प्रयोग होने वाले बर्तनों को कोई धोना नहीं चाहता था, इसलिए ये लोग डिस्पोजल कपों का इस्तेमाल किया करते थे.

बता दें कि दुनियाभर में 90 के दशक से डिस्पोजल कपों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन हजारों साल पहले के इन कपों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उस समय भी इनका इस्तेमाल किया जाता था. हालांकि ये प्लास्टिक या थर्माकोल या कागज के न होकर मिट्टी के हुआ करते थे. लेकिन अब सिर्फ प्लास्टिक, थर्माकोल और कागज के बने डिस्पोजल कपों का ही ज्यादा प्रयोग होने लगा है. 

जिसके चलते पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है और ये हमारे लिए खतरा बन गए हैं. बता दें कि दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे प्लास्टिक के इस्तेमाल से समुद्री जीवों की भी संख्या में लगातार कमी आ रही है. हाल ही में हिंद महासागर के तटों पर करीब 10 लाख जूते, 3,70,000 से अधिक टूथब्रश और 40 करोड़ से अधिक प्लास्टिक के टुकड़ों मिले हैं. जो इस बात का गवाह है कि आने वाले वक्त में समुद्र में इस तरह के सामान पाया जाना जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए खतरा बना हुआ है.

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First published: 18 December 2019, 15:10 IST
 
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