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हौसले की उड़ान: बिना हाथ के 100 किलोमीटर की स्पीड से बाइक चलाता है पश्चिम बंगाल का ये शख्स

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 February 2018, 12:45 IST

वो इंसान जिंदगी में कुछ भी कर सकता है, जो कुछ कर-गुजरने की चाहत अपने मन में पाल लेता है. उसके दिल में उम्मीदें हिलोरें मारने लगती हैं. जिसे करने के लिए वो कुछ भी कर देता है. इसके लिए तमाम बाधाएं और चुनौतियां भी कम पड़ जाती हैं

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक ऐसा शख्स रहता है जिसने अपने जज्बा और उम्मीदों से वो कर दिखाया जिसे करने के लिए साहस और हिम्मत की जरूरत होती है. दरअसल, पुरुलिया इलाके के पांचा गांव में झुंटू चटर्जी नाम का एक शख्स रहता है. झुंटू का दाहिना हाथ नहीं है. लेकिन उसे बाइक चलाने का बेतहाशा शौक है. झुंटू के इस शौक पर उसका हाथ न होना कभी भारी नहीं पड़ा. बल्कि उल्टा झुंटू की वो कमजोरी उसकी ताकत बन गई.

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 एक हाथ से चलाते हैं बाइक

झुंटू चटर्जी का दाहिना हाथ कटा हुआ है, उन्होंने अपने कटे हुए हाथ को अपनी ताकत बना लिया है. झुंटू एक ही हाथ से बाइक चलाते हैं. जिसके लिए उन्हें अपने बाजुओं में एक तार बांधना पड़ता है. फिर वो हवा से बातें करते हैं. उन्हें देखने वाला हर व्यक्ति बस देखता ही रह जाता है.

तमाम दिक्कतों का सामना किया है झुंटू ने

झुंटू चटर्जी की जिंदगी में तमाम ऐसे मोड़ आए हैं. जिसने उन्हें झकझौर कर रख दिया. एक हादसे में उन्होंने अपना दाहिना हाथ खो दिया, उनकी एक किडनी भी नहीं है. क्यों कि उन्होंने अपनी किडनी अपनी बेटी को दे दी. लेकिन फिर भी झुंटू ने हार नहीं मानी. और हर चुनौती को स्वीकार कर आगे बढ़ते गए. झुंडू बाइक चलाने वक्त एक्सलरेटर से एक तार खींचकर अपने बाज़ुओं पर बांधते हैं और उसे खींचकर बाइक चलाते हैं.

झुंटू के मुताबिक वो हर काम एक हाथ से कर लेते हैं. बाइक भी एक हाथ से चलाते हैं. उनका कहना है कि ये सब काम वो अपने दिमाग से करते हैं. झुंटू बताते हैं कि वो बाइक को 80 से 100 तक की स्पीड पर आराम से चला सकते हैं.

 दुकान चलाते हैं झुंटू चटर्जी

वैसे झुंटू एक दुकानदार हैं. अपने परिवार का पेट भरने के लिए वो इसी दुकान पर निर्भर हैं. अक्सर व्यापार के लिए उन्हें आसपास के इलाकों में भी जाना पड़ता है. जिसके लिए झुंटू पैसेंजर गाड़ी से ही सफर करते हैं. जिससे यात्रा पर ज्यादा खर्च ना करना पड़े.

पाई-पाई जोड़कर खरीदी थी बाइक

यात्रा से बचे पैसे से वो एक बाइक खरीदना चाहते थे. लेकिन हर बार हालात ऐसे रहे कि उन्हें बाइक खरीदने की इजाजत नहीं देते थे. क्यों कि कम आमदनी में परिवार के साथ बेटी के इलाज के लिए भी उन्हें पैसे की हमेशा जरूरत रहती थी. लेकिन एक दिन उन्होंने बाइक खरीद ली. उसके बाद बाइक चलाने की दिक्कतों भी उन्हें परेशान किया लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बाइक चलाने में सबको पीछे छोड़ दिया.

First published: 6 February 2018, 12:44 IST
 
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