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योद्धाओं से कम नहीं हैं इस जनजाति के लोग, पीते हैं जिंदा जानवरों का खून

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 July 2018, 12:21 IST

हर देश का अपना-अपना कल्चर होता है और वहां रहने वाली जाति-जनजाति भी अपने कल्चर के हिसाब से जीवन जीती है. अफ्रीका में मसाई जनजाति भी अपने कल्चर को जिंदा रखने के लिए हजारों सालों से बिना आधुनिक संसाधनों के जीवन गुजार रही है. मसाई जनजाति को चरवाहों और योद्धाओं के रूप जाना जाता है. ये जनजाति तंजानिया और केन्या के जंगली रेगिस्तानी इलाकों में निवास करती है.

 

मसाई ट्राइब्स अपने कल्चर के चलते काफी मशहूर है. ये ज्यादातर मसाई मारा, सेरेनगेटी और अंबोसेली जैसे रिजर्व के पास रहते हैं. केन्या और तंजानिया में इनकी संख्या दस लाख के करीब है. इस जनजाति के लोग सरकारी नियम और कानूनों पर नहीं चलते , बल्कि इनके अपने बनाए मौखिक नियम-कायदे हैं, जो इनकी जिंदगी के सभी पहलुओं को समेटते हैं. मसाई समुदाय में समूह का बुजुर्ग पुरुष मुखिया होता है और उसी के फैसले माने जाते हैं.

मसाई ट्राइब्स के लोग लाल रंग के कपड़े पहनते हैं. जिससे इनकी पहचान आसान हो जाती है. जिसे शुका कहा जाता है. यही नहीं इस जनजाति के लोग किसी बॉडी बिल्डर या योद्धा को मात देने के लिए काफी प्रसिद्ध हैं. मसाई जनजाति के लोग किसी की मौत के बाद उसका शव ना तो दफनाते और ना ही जलाते, बल्कि शव को खुले में छोड़ दिया जाता है. उनका मानना है कि जमीन में शव दफनाने से जमीन खराब हो जाती है.

मसाई जनजाति के लोग घुमंतुओं की तरह जिंदगी जीते हैं, ताकि इनके जानवरों को चरने के लिए नई जगह मिल सके. इनकी जिंदगी में जानवरों की भूमिका काफी अहम है, ये मसाई आदिवासियों के खाने का जरिया हैं. इनकी संपत्ति इनके जानवरों और बच्चों की संख्या से तय होती है.

मसाई खाने के लिए दूध और मीट से लेकर कुछ खास मौकों पर जानवरों के खून का भी इस्तेमाल करते हैं. किसी की डिलवरी या खतना के वक्त इनके परिवार जिंदा जानवरों का खून पीते हैं. इनका मानना है कि जानवरों के खून से इम्युन सिस्टम मजबूत होता है. ये लोग नशा कम करने के लिए या हैंगओवर कम करने के लिए खून पीते हैं.

ये लोग जानवरों का खून दो तरीकों से पीते हैं. हले तरीके में जानवरों की गर्दन पर तीर से छेद करके कुछ मात्रा में खून इकठ्ठा किया जाता है. दूसरे तरीके में जानवरों की गर्दन काटकर सीधे ही मुंह लगाकर खून पिया जाता है. ये जहां भी जाते हैं, छोटी-छोटी झोपड़ियां बनाकर रहते हैं, जिसके चारों तरफ फेंसिंग होती है. बता दें कि मसाई जनजाति के लोगों की यह परंपरा अब खत्म होने के कगार पर है. पहले यहां ‘मर्द’ बनने का एक ही तरीका था, भाले से शेर का शिकार करना. ये लोग जानवरों की खाल का प्रयोग बिस्तर के लिए करते हैं.

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First published: 19 July 2018, 12:21 IST
 
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