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यहां के जंगलों आज भी बसा हुआ है नागलोक, दर्शन करने से दूर हो जाता है कालसर्प दोष

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2020, 10:59 IST

हमारे देश में कई ऐसी कहानियां जिन्हें सुनकर वाकई काफी हैरानी होती है. आज मैं आपको बताने जा रही हूं नागलोक के रहस्य के बारे में जिसे आपने शायद बचपन में दादा-दादी के कहानियों में सुना होगा.

सतपुड़ा के घने जंगलों में आज भी नागलोक बसा हुआ है. कहा जाता है कि ये रास्ता नागलोक को जाता है. यही वजह है कि नागलोक के इस द्वार पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर नागदेव की उपासना करते हैं. यहां पहुंचने के लिए काफी मुश्किल पहाड़ों की चढ़ाई करनी पड़ती है. टाइगर रिजर्व होने के चलते से क्षेत्र साल में एक या दो ही बार खुलता है.


मान्यता है कि यहां मात्र दर्शन भर से ही हर मनोकामना पूरी हो जाती है. साथ ही ये भी कहा जाता है कि यदि कोई एक बार नागद्वारी की यात्रा पूरी कर ले तो इससे कालसर्प दोष दूर हो जाता है. ज्यादातर यहां की सभी यात्राएं जुलाई महीने में शुरू होती हैं.

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नागद्वारी के इस रास्ते में नागमणि मंदिर है. इसके अंदर तकरीबन 100 फिट की चिंतामणि गुफा है. यहां पर नागदेवता की कई सारी मूर्तियां हैं. इसी के साथ जब यहां पर भक्त दर्शन करने आते हैं तो उन्हें कई सारे सांपो का सामना करना पड़ता है.

लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि यहां का कोई भी सांप किसी भी भक्त को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है. कहा जाता है कि नागदेव यहां खुद अपने भक्तों की रक्षा करते हैं. सतपुड़ा की इन पहाड़ियों पर सावन के महीने में अलग ही रौनक बनी रहती है. नागपंचमी के दिन यहां विशाल मेले का होता है. इस मौके पर देश के कोने कोने से भक्तगण दर्शन करने आते हैं.

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First published: 25 July 2020, 10:59 IST
 
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