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यहां की महिलाएं शादी के बाद भी नहीं छोड़ती घर, पतियों को होता ये हाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 August 2018, 16:36 IST

हर देश में अनेक जनजातीय पाई जाती हैं. हर जनजाति की अपने रीति-रिवाज और परंपराएं होती है. सदियों से ये लोग इन्हीं परंपरों को सहेजे हुए है और आज भी इन्हें नहीं छोड़ रहे. भारत में भी ऐसी तमाम जनजातियां है जो अपने कल्चर और परंपराओं को आज भी मानती आ रही हैं.

इन जनजातियों की परंपराएं ऐसी हैं जो हर किसी को हैरान करती है. मेघालय में भी एक ऐसी जनजाति रहती है जिनकी परंपराओं को जानकर आप हैरान रह जाएंगे. इस जनजाति का नाम है खासी जनजाति. खासी ट्राइब्स भारत के मेघालय में निवास करती हैं. यह जनजाति उन गिनी चुनी जनजातियों में से एक है, जहां पुरुष की बजाय महिला प्रधान होती हैं.

 

खासी जनजाति में सदियों से परंपरा चली आ रही है कि संपत्ति मां के नाम रहती है. इसके बाद बेटी को ट्रांसफर कर दी जाती है. इस जनजाति में महिलाओं का वर्चस्व है. वह कई पुरुषों से शादी कर सकती हैं. इतना ही नहीं, पुरुषों को अपने ससुराल में ही रहना पड़ता है. हालांकि, हाल के सालों में यहां कई पुरुषों ने इस प्रथा में बदलाव लाने की मांग की है.

उनका कहना है कि वे महिलाओं को नीचा नहीं करना चाहते, बल्कि बराबरी का हक मांग रहे हैं. इस जनजाति में परिवार के तमाम फैसले लेने में भी महिलाओं को वर्चस्व हासिल है. इस समुदाय में बेटी के जन्म होने पर काफी जश्न मनाया जाता है, जबकि बेटे के जन्म लेने पर उतनी खुशी नहीं होती. इसके अलावा, यहां के बाजार और दुकानों पर भी महिलाएं ही काम करती हैं. बच्चों का सरनेम भी मां के नाम पर होता है.

खासी समुदाय में सबसे छोटी बेटी को विरासत का सबसे ज्यादा हिस्सा मिलता है. इस कारण से उसी को माता-पिता, अविवाहित भाई-बहनों और संपत्ति की देखभाल भी करनी पड़ती है. छोटी बेटी को खातडुह कहा जाता है. उसका घर हर रिश्तेदार के लिए खुला रहता है. इस समुदाय में लड़कियां बचपन में जानवरों के अंगों से खेलती हैं और उनका इस्तेमाल आभूषण के रूप में भी करती हैं.

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First published: 1 August 2018, 16:36 IST
 
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