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प्राचीन काल में इस तरीके से होता था प्रेग्नेंसी टेस्ट, बेटी या बेटा होने की मिलती थी जानकारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 February 2019, 16:12 IST

प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए आज भले ही बाजार में तमाम तरीके मौजूद हों, लेकिन प्राचीन काल में ऐसा नहीं था. प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए प्राचीन काल में महिलाएं कुछ अलग तरीके से गर्भावस्था की जांच किया करती थीं. यही नहीं कि आज के वक्त में ही महिलाएं प्रेग्नेंसी टेस्ट करती हैं बल्कि आज से 3500 साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे. जिसके लिए आज से अलग तरह से टेस्ट किया जाता था. यही नहीं इस टेस्ट से इस बात का भी पता चल जाता था कि गर्भ में पल रहा बच्चा बेटी है या बेटा.

न्यू किंगडम एरा के पैपीरस यानि लिखित दस्तावेज में इस बात का जिक्र है कि मिस्र में कई सौ साल पहले भी प्रेग्नेंसी टेस्ट किए जाते थे. इस लिखित दस्तावेज में आंखों के रोग संबंधी इलाज के बारे में भी बताया गया हैपैपीरस के मुताबिक, 1500 से 1300 ईसा पू. के बीच महिलाओं को प्रेग्नेंसी टेस्ट के लिए अपना यूरिन गेहूं और जौ के एक बैग में डालना होता था. कुछ दिनों बाद फिर उस बैग को देखा जाता था. अगर गेहूं और जौ का बीज उगने लगता तो इसका मतलब होता कि महिला गर्भवती हैं और अगर कुछ भी नहीं उगता तो इसका मतलब महिला गर्भवती नहीं है.

यही नहीं पैपीरस में प्रेग्नेंसी के अलावा लड़की और लड़के के जन्म की पहचान के लिए भी तरीके लिखे गए हैं. जिसमें बताया गया है कि अगर उस बैग में सिर्फ जौ उगता, तो यह समझा जाता कि लड़के का जन्म होगा और अगर गेहूं उगता तो समझा जाता कि लड़की पैदा होगी.

कार्ल्सबर्ग पैपीरस कलेक्शन के प्रमुख किम रिहोल्ट के मुताबिक, प्राचीन मिस्र से जुड़े कम से कम 12 संरक्षित चिकित्सा ग्रंथ थे. हालांकि ये क्षतिग्रस्त हैं और प्राचीन लिपि में लिखे गए हैं, जिसे पढ़ना काफी मुश्किल है. उन्होंने बताया कि इन चिकित्सा ग्रंथों में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं.

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First published: 26 February 2019, 16:15 IST
 
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