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रिटायरमेंट के बाद आर्मी के कुत्तों को दी जाती है ये खतरनाक सजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2018, 15:39 IST

दुनियाभर में इंसान से ज्यादा कुत्ते को वफादार माना जाता है. इंसान भले ही अपने मालिक को धोखा दे दे लेकिन कुत्ता जैसा जानवर अपने मालिक के साथ मरते दम तक वफादारी निभाता है. इसीलिए भारतीय आर्मी भी कुत्तों पर अपना भरोसा जताती है. और कुत्तों को भी आर्मी में भर्ती किया जाता है.

कुत्तों की सूँघने की क्षमता और एक्टिव होने की वजह से इन्हे जासूसी के कामों में प्रयोग में लाया जाता है. सेना भी जासूसी के लिए कुत्तों का इस्तेमाल करती है. सुनने में आता है कि भारतीय सेना रिटायरमेंट के बाद वफादार कुत्तों को मार देती है. ये बात बिलकुल सच है पर इसके पीछे कुछ वजह ही ऐसी है की उन्होंने मजबूरन ऐसा करना पड़ता है.

आपने देखा होगा कि भारतीय सेना हो या फिर पुलिस, यहां इंसानों के साथ साथ कुत्ते भी काम करते हैं. कुत्ते बहुत सी ऐसी जगहों पर काम करते हैं जहां इंसान नहीं पहुंच सकता. लेकिन अब ये सवाल उठता है कि भारतीय सेना इन कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद खुद ही गोली क्यों मार देती है.

 

क्या ये ठीक है कि किसी को वफादारी के इनाम के रूप में मौत की सजा दी जाए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऐसे ही एक नाराज व्यक्ति ने आरटीआई के जरिए रिटायरमेंट के बाद कुत्तों को गोली से मारे जाने को लेकर सेना से जवाब मांगा था, जिसके जवाब में सेना ने कुत्तों को रिटायरमेंट के बाद मारे जाने की वजह बताई है.

सेना के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद कुत्ता किसी ऐसे व्यक्ती को ना मिल जाए जिससे देश को हानि पहुंच सके, क्योंकि कुत्ते को भारतीय सेना के हर उऩ गुप्त स्थानों के बारे में पता होता है. जो उसे ट्रेनिंग के दौरान बताए जाते है. भारतीय सेना ने ये भी बताया कि अगर कुत्ते का स्वास्थ्य ठीक नहीं होता है तो उसका चेकअप भी करवाया जाता है.

सेना ने मुताबिक, यदि इलाज के दौरान एक महीने तक कुत्ते की हालत में कोई सुधार नहीं होता है. तब भी उसे मार दिया जाता है. साथ ही इसके पहले पूरे सम्मान के साथ उसकी विदाई की जाती है.

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First published: 7 July 2018, 15:39 IST
 
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