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जब अमेरिकी सेना ने नागासाकी पर गिरे बम जितने खतरनाक परमाणु बम को कर दिया था लापता

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 July 2020, 15:17 IST
(Getty Image)

अमेरिका (America) वो देश जिसने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान (Japan) पर परमाणु बम (Nuclear Bomb) गिराकर पूरी दुनिया में अपनी शक्ति का लोहा मनवाया था. दूसरे विश्व युद्ध (World War II) में जापान की हार हुई और शुरू हुआ एक शीत युद्ध, सोवियत यूनियन और अमेरिका के बीच, जिसमें अमेरिका किसी भी किमत पर जीत चाहता था, क्योंकि अगर इस शीत युद्ध में उसकी हार होती तो उसका सीधा मतलब होता विश्व में उसकी बादशाहत खत्म, इसीलिए वो हर एक उपाय करने लगा. लेकिन इस दौरान अमेरिका ने कुछ ऐसी गलती भी हुई जिसकी सजा दुनिया कभी भी भुगत सकती है, आपको जानकर हैरानी होगी कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद से अमेरिकी सेना अभी तक कुल आठ परमाणु बम को गुमा चुकी है और अमेरिका ने आज कर इसकी जानकारी नहीं दी है कि आखिर वो बम कहा है और उससे कितना नुकसान हो सकता है.

जापान पर परमाणु बम से हमला करने के पांच साल बाद अमेरिका ने एक ऐसा विमाल विकसित किया जो पूरे विश्व में कही भी परमाणु बम ले जाने की क्षमता रखता था. इसे विमान को दि कन्वेयर बी -36 "पीसमेकर" कहा गया और अमेरिकी सेना इस विमान से साथ एक परीक्षण करने के लिए उत्सुक थी और इस दौरान वो इसमें एक नया परमाणु बम लगाना चाहती थी, जिससे इसकी सफलता का सही आंकलन हो सके. इसके लिए अमेरिकी सामरिक वायु कमान (SAC) ने महीनों की पैरवी के बाद परमाणु ऊर्जा आयोग से Mark IV परमाणु बम को बिना उसके प्लूटोनियम कोर, विमान में लगाने की अनुमति मांग ली थी.


13 फरवरी 1950 को B-36 जिसे फ्लाइट 2075 भी कहा जाता है उसने अलास्का के फेयरबैंक्स के पास एयेल्सन एयर फोर्स बेस से 17 चालक दल के साथ उड़ान भरी. इस उड़ान का उद्देश्य, सोवियत संघ के एक प्रमुख शहर पर बमबारी करने का परीक्षण करना था. B-36 अलास्का से मोंटाना तक 5,500 मील का रास्ता तय करता, फिर सैन फ्रांसिस्को आता अपने लक्ष्य पर बमबारी करने, और उसके बाद टेक्सास में कार्सवेल एयर फोर्स बेस पर लैंड करता.

लेकिन सब कुछ योजना के अनुसार नहीं हुआ, टैक ऑफ के कुछ ही समय बाद जैसे ही प्लेन हवा में ऊंचे पहुंचा, बम पर बर्फ जमने लगी, जिसके कारण इंजनों पर जबरदस्त दबाव पड़ा. ऐसे में तीन इंजन में आग लग गई जिसके कारण उन्हें बंद करना पड़ा, अब केवल तीन ही इंजन चल रहे थे, जिसके कारण B -36 500 फीट प्रति मिनट की दर से नीचे गिरने लगा. ऐसे में प्लेन के कैप्टन ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि वो सेना के नियमों के अनुसार बम को दुश्मन के हाथों में बचने से रोके और उसे नष्ट कर दे, उनके आदेश का पालन हुआ और फिर एक एक करने सैनिक प्लेन से कूद गए और B-36 क्रैश हो गया.

 

इसके तुंरत बाद अमेरिका और कनाडा की सेना ने मिलकर एक अभियान चलाया और 17 में से 12 लोगों को सही सलामत खोज निकाला गया लेकिन पांच लोगों की कभी कोई जानकारी सामने नहीं आई. इतना ही नहीं B-36 में जो प्लेन था उसकी भी जानकारी कभी सामने नहीं आ सकी. हालांकि, कई तरह की अफवाहें उड़ी. लेकिन साल 2013 में एक चौकाने वाला खुलासा हुआ. कनाडा में गोताखोरों ने इस बम को खोज निकालने का दावा किया. उस दौरान मीडिया रिपोर्ट में लिखा गया कि सीन स्मिरिचिंस्‍की नाम के गोताखोर को ब्रिटिश कोलंबिया के प्रिंस रूपर्ट के पास एक रहस्‍यमयी वस्‍तु मिली है. कनाडा के डिपार्टमेंट ऑफ नेशनल डिफेंस ने इस बारे में कहा था कि स्मिरिचिंस्‍की को जो डिवाइस मिली है, वह B-4 पर जो बम था उस जैसी लगती है. विभाग ने कहा है,"उस डमी कैप्‍सूल में कोई परमाणु तत्‍व नहीं था और इस बम से किसी तरह का संदिग्‍ध रेडियाेलॉजिकल खतरा नहीं है."

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First published: 1 July 2020, 14:31 IST
 
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