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इतने खतरनाक होते हैं इस जनजाति के लोग, जिस पेड़ को छूते हैं हो जाता है शापित

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2018, 17:19 IST

हमारे देश में कई तरह की जनजातियां पाई जाती है. जिनमें बिरहोरी जनजाति विशेष जनजातियों में शामिल है. ये जनजाति मुख्यत: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में निवास करती है. बिरहोर जनजाति के संबंध में ये मान्यता है कि ये जिस पेड़ को छू देते हैं वो पेड़ शापित हो जाता है और उस पर कभी बंदर नहीं चढ़ता. यही नहीं बिरहोर जनजाति खाने के लिए बंदर का शिकार करती है. इसके पीछे की कहानी को रामाणय काल से संबंधित माना जाता है.

बताया जाता है कि बिरहोर जनजाति के लोग शिकार कर जीवनयापन करते हैं. ये लोग मुख्य रूप से बंदर का शिकार करते हैं. ये लोग सामूहिक रूप से शिकार करते हैं. शिकार के लिए कोई निश्चित शुभ मुहूर्त या दिन नहीं होता. शिकार पर जाने से पहले बिरहोर लोग धार्मिक क्रिया करते हैं,

जिससे पता चल सके कि शिकार के लिए जानवर मिलेगा या नहीं. इसके लिए तीन आदमी एक जगह बैठते हैं और एक चावल लेकर थोड़ा-थोड़ा सबके हाथों में देता है फिर सब जोहार-जोहार करके मंत्र पढ़ते हैं और भूत को बुलाते हैं.

ऐसी मान्यता है कि मंत्र पढ़कर भूत बुलाने के बाद जो आदमी चावल देता है उसके शरीर में भूत प्रकट होता है. जब वह कांपने लगता है तो मान लिया जाता है कि उस व्यक्ति पर भूत प्रकट हो गया है. उसे एक बोतल शराब देते हैं और पूछते हैं कि शिकार मिलेगा या नहीं? जब भूत बता देता है कि शिकार मिलेगा तो थोड़ी सी शराब जमीन पर गिराते हैं. इसके बाद बची हुई शराब को सब मिलकर पीते हैं. उसके बाद सब शिकार करने निकल जाते हैं.

शिकार के लिए कम से कम छह लोग जाते हैं. सब के पास धनुषबाण, नाठी, टांगी, हंसिया और एक आदमी के पास बंदर पकड़ने का जाल होता है. जंगल में जाने के बाद सभी लोग एक जगह पर बैठकर विचार विमर्श करते हैं. इसके बाद दो लोग बंदर ढूंढने निकल जाते हैं और बंदर मिलने पर सिटी बजाते हैं. सिटी की आवाज सुन उसके अन्य साथी भी सिटी बजाते हैं, इसके बाद सभी चुपके-चुपके बंदर की दिशा में चलते हैं और बंदर को चारो ओर से घेर लेते हैं.

दो लोग पेड़ के बीच 15फुट लम्बा बंदर जाल बांध देते हैं और उस ओर को छोड़कर बाकी ओर से घेर लेते हैं. इस दौरान कुछ लोग पेड़ की डाल लेकर बैठे रहते हैं ताकि बंदर को पेड़ होने का भ्रम हो. वे लोग बंदर को घेरकर इधर-उधर दौड़ाते हैं. कहीं भागने की जगह न मिलने पर बंदर जाल की ओर भागता है और फंस जाता है. उसके बाद इस बंदक का मीट बनाया जाता है.

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First published: 17 July 2018, 17:08 IST
 
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