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मासूम बेटी को बेचना चाहता है ये शख्स, सच्चाई जानकर भर आएंगी आपकी आंखें

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 August 2018, 13:47 IST

चीन दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाला देश है. भले ही आज वो अमेरिका जैसे ताकतवर देश के सामने ताल ठोकता नजर आता हो, लेकिन आम लोगों का जीवन यहां आज भी परेशानियों में कट रहा है. ये हम नहीं कह रहे बल्कि वो तस्वीरें कह रही हैं जो आजकर चीनी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही हैं.

दरअसल, चीनी सोशल मीडिया में आजकल कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें एक शख्स एक मासूम बच्ची को गोद में लिए खड़ा हुआ है. उसके हाथ में को पोस्टर भी है, जिसपर चीनी भाषा में कुछ लिखा हुआ है. बताया जा रहा है कि ये शख्स अपनी मासूम बेटी को बेचना चाहता है, क्योंकि उसे पैसों की जरूरत है जिससे वो अपने बेटे का इलाज करा सके.

 

बता दें कि इस शख्स का चार साल के बेटा ल्यूकेमिया से पीड़ित है और अब परिवार के पास बेटे के इलाज के लिए पैसे नहीं बचे हैं. बच्ची के पिता का कहना है कि अगर कोई उनके बेटे के इलाज का खर्चा उठाए तो वो अपनी चार साल की बेटी को उन्हें दे देंगे.

बीजिंग यूथ डेली के एक रिपोर्टर ने इस तस्वीर को शेयर करने वाले को ढूंढ निकाला, ये तस्वीर चेंग्दू की है. जहां के एक अस्पताल में बच्चे के इलाज चल रहा है. रिपोर्टर के मुताबिक उनके बेटे का ल्यूकेमिया का इलाज किया जा रहा है, इस वजह से परिवार पर भारी कर्जा हो गया है. उन्होंने किसी तरह दान में 90,000 युआन इकट्ठे किए थे, लेकिन दानदाताओं के प्लेकार्ड को रिपोर्ट करने के बाद उन्हें 40,000 युआन नहीं मिल सके और उनका वीचैट अकाउंट भी बंद कर दिया गया.

बता दें कि चीन में भी भारत की तरह बेटों को वरीयता दी जाती है. मां के गर्भ पल रहे बच्चों का लिंग जानने की वजह से चीन में लिंगानुपात का में बहुत बड़ा अंतर आया है. ऐसे में बेटी को बेचने वाले पिता के लिए लोगों ने मुश्किल पैदा कर दी. हालांकि एक इंटरव्यू में बच्चों की मां ने बताया कि, जिस साइन बोर्ड का  उनके पति ने बेटी को बेचने के लिए इस्तेमाल किया, वो सिर्फ लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए था. बच्चे की मां ने दावा किया कि उनके पति ने कभी नहीं सोचा कि वो अपनी बेटी को बेच दें.

वहीं मां के इन दावों को भी कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गलत ठहराया है. और बेटी को बेचने के लिए उनकी आलोचना की है. लेकिन ये पहली बार है कि चीन में किसी पिता को अपने बेटे के इलाज के लिए अपने बच्चे को बचने का फैसला लेना पड़ा हो.

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First published: 14 August 2018, 13:47 IST
 
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