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कोरोना संकट के बीच पृथ्वी पर बड़ा खतरा, ओजोन परत में 10 लाख किमी का छेद, हो सकता है महाप्रलय

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 April 2020, 13:11 IST

Coronavirus: पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के प्रकोप से परेशान है. इस बीच धरती पर एक और बड़ा संकट मंडरा रहा है, इससे महाप्रलय आ सकता है. खबर है कि उत्‍तरी ध्रुव पर आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में काफी बड़ा छेद हो गया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह छेद करीब 10 लाख वर्ग किलोमीटर का है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे महाप्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

दुनियाभर में लॉकडाउन की वजह से हुआ ऐसा!

माना जा रहा है कि आर्कटिक के ऊपर ओजोन परत में बने इस नए छेद का कारण वातावरण में हो रहे बदलाव के कारण है. उ त्‍तरी ध्रुव पर इस समय अप्रत्‍याशित तौर पर मौसम पिछले कई सालों की तुलना में ज्‍यादा ठंडा है. दरअसल, दोनों ही ध्रुवों पर सर्दी के मौसम में ओजोन की कमी आ जाती है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा आर्कटिक पर अंटार्कटिका के मुकाबले काफी कम होता है.

ओजोन परत में यह छेद ध्रुवों पर तापमान बहुत ही ज्यादा कम होने, सूर्य की रोशनी, बहुत बड़े हवा के भंवर और क्लोरोफ्लोरो कार्बन पदार्थों के कारण होता है. उत्तरी ध्रुव पर आमतौर पर अंटार्कटिका जैसी भयंकर ठंड नहीं होती. लेकिन इस साल उत्तरी ध्रुव पर  बहुत ही ज्यादा ठंड पड़ी. इससे स्ट्रटोस्फियर पर एक पोलर वोर्टेक्स बन गया.

फिर जब ठंड का मौसम गया तो वहां सूर्य की रोशनी पहुंची. इसके बाद ओजोन परत खत्म होना शुरू हुआ. हालांकि  इसकी मात्रा दक्षिण ध्रुव की तुलना में काफी कम रही. वैज्ञानिकों ने पाया कि आर्कटिक क्षेत्र के ऊपर ओजोन की मात्रा में बहुत ज्यादा गिरावट हुई. जिससे ओजोन परत में काफी बड़ा छेद हो गया.

ओजोन का काम पृथ्वी की सतह पर सूर्य से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों को रोकना होता है. इससे पृथ्‍वी पर जीवन को लेकर कई समस्याएं हो सकती हैं. अब अल्ट्रावॉयलेट किरणें सीधे धरती की सतह पर आएंगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना वायरस की वजह से इस समय पूरी दुनिया में लॉकडाउन है. इसके कारण ओजोन लेयर में बने इस होल की पूरी कार्यप्रणाली ही गड़बड़ा गई है.

इंसानों और जानवरों को हो सकता है गहरा नुकसान

वैज्ञानिकों का कहना है कि ओजोन लेयर में छेद होना सार्वजनिक चिंता का विषय है. ओजोन परत में छेद होने की वजह से आर्कटिक क्षेत्र में गर्मी बढ़ेगी. इससे यहां मौजूद बर्फ पिघलने की रफ्तार में इजाफा होगा. सूर्य की यूपी रेज सीधे धरती की सतह पर पहुंचने के कारण लोगों में स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी बढ़ेगी. 

चिली के पंटा एरेनास का अध्ययन बताता है कि ओजोन में कमी और UVB स्तर में वृद्धि के साथ कारण लोगों में आंख के मोतियाबिंद की शिकायत बढ़ सकती है. यूवी विकिरण में वृद्धि से फसलों को काफी नुकसान हो सकता है.

First published: 10 April 2020, 13:11 IST
 
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