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कोरोना वायरस: 700 साल पहले लोग हुए थे क्वारंटीन, 40 दिन तक पानी में खड़े होकर बचानी पड़ी थी जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2020, 13:15 IST

Coronavirus: दुनियाभर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के कारण लोगों को क्वारंटीन किया गया है. इसके साथ ही क्वारंटीन का इतिहास भी सामने आ गया है. संक्रामक बीमारियों को रोकने और लोगों को बचाने के लिए 700 साल पहले भी रोगियों को स्वस्थ व्यक्तियों से दूर रखने की कोशिश होती रही हैं. इसे ही क्वारंटीन कहा गया है.

ओल्ड टेस्टामेंट में भी सेल्फ-आइसोलेशन के बारे में उल्लेखन है. 'क्वारंटीन' शब्द का इतिहास दिलचस्प है. क्वारंटीन शब्द इटैलियन भाषा के 'क्वारंतीनो' से निकला है. क्वारंटीन का अर्थ है चालीस दिन की अवधि में अकेले रखना.

प्लेग से मर रहे थे लोग

14वीं शताब्दी में यूरोप प्लेग जैसी खतरनाक बीमारी फैली थी. इसस वेनिस जैसे तटीय शहरों को बचाने के लिए संक्रमित बंदरगाहों से शहर में पहुंचने से पहले प्रत्येक जहाज को  40 दिन तक पानी में ही लंगर डालकर खड़े रहना पड़ता था. इसका मतलब यह है कि 40 दिन तक जहाज को अपनी यात्रा रोकनी पड़ती थी. इस परिपाटी को धीरे-धीरे क्वारंटीन कहा जाने लगा. 

 

साल 1374 में वेनिस ने एक आदेश जारी कर कहा था कि विशेष स्वास्थ्य परिषद, जहाजों तथा उसके यात्रियों को शहर में आने की अनुमति न दी जाए. इन सबको पास के सेन लैजारो द्वीप में रहना पड़ेगा. इसके कारण वेनिस में कुछ विशेष देशों के जहाजों और यात्रियों के साथ भेदभाव तथा अन्य गड़बड़ियां भी हुई थीं.

1377 में एड्रीयाटिक सागर के पार रागुजा (जो आधुनिक ड्यूब्रोन्विक है) की महापरिषद ने इस खतरनाक महामारी को फैलने से रोकने के लिए एक नया कानून बनाया था. इस कानून के मुताबिक हर जहाज और व्यापारियों को 30 दिन तक आइसोलेशन में रहना होता था. कानून में कहा गया था कि हर व्यक्ति को मुख्य शहर में प्रवेश करने से पहले खुद नजदीकी सेवतट कस्बे या द्वीप में 30 दिन बिताने होंगे.

ड्यूब्रोन्विक ने ऐसा तरीका सबसे पहले लागू किया, यह बेहद समझदारी भरा और सफल कदम साबित हुआ. इसे पूरी दुनिया ने अपनाया. संक्रमित इलाकों से आने वाले लोगों और पशुओं को स्वस्थ आबादी से अलग रखने वाला ड्यूब्रोन्विक, मध्य सागर का पहला बंदरगाह था. वहीं वेनिस ने सभी जहाजों और व्यापार पर रोक लगाई, जिससे वहां का जीवन थम गया था.

रागुजा गणतंत्र ने अपने इस क्वारंटीन कानून का उल्लंघन करने पर कठोर दंड की सजा सुनाई और जुर्माने लगाए थे. पहले आइसोलेशन की अवधि 30 दिन होती थी, बाद में इसे 40 दिन कर दिया गया था. हालांकि ऐसा करने की सही वजह किसी को नहीं पता. कुछ लोगों का कहना है कि 30 दिन की अवधि नाकाफी थी. क्योंकि बीमारी के इंक्यूबेशन अवधि की सही जानकारी नहीं थी.

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First published: 4 May 2020, 13:10 IST
 
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