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जब 41 साल बाद अपनी मां से मिला यह करोड़पति बिजनेसमैन

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 November 2019, 16:29 IST

मां का अपनी संतान के साथ जो रिश्ता होता है वो दुनिया में किसी दूसरे रिश्ते से ज्यादा महत्व पाता है. भले ही आपके पास किसी चीज की कमी ना हो, आप ऐशो-आराम की जिंदगी बिता रहे हो, लेकिन मां की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती. कुछ ऐसा ही हुआ डेनमार्क के रहने वाले इस बिजनेसमैन के साथ जो सात समंदर पार बीते कुछ दिनों से अपनी मां की खोज के लिए भारत आया और आखिरकार उसे अपनी मां मिल ही गई.

दरअसल, डेनमार्क के रहने वाले डेविड नील्सन 41 साल बाद अपनी सगी मां से मिलने भारत पहुंचे. डेविड भारत में अपनी मां को पिछले छह सालों से खोज रहे थे. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, नील्सन जिनका असली नाम शांतकुमार हैं वो डेनमार्क में रहते हैं और उनका जन्म 25 जनवरी 1978 को वाशरमनपेट की धनलक्ष्मी और कालियामूर्ती के घर में हुआ था. जब धनलक्ष्मी के पति ने उन्हें छोड़ दिया तब वो अपने दो बच्चों नीलसन और उनके भाई मैनुअल राजन के साथ उसी साल नवंबर में पल्लवराम के चैरिटेबल होम में शरण ली.


हालाँकि, धनलक्ष्मी को एक साल बाद ही घर खाली करने के लिए कहा गया क्योंकि अनाथालय ने दावा किया कि उनकी उपस्थिति के कारण दूसरे बच्चों को उनके घर की याद आ रही थी. वह अपने बच्चों से अक्सर मिलने आती थी. लेकिन एक दिन जब वो अपने बच्चों के लिए मिलने के लिए गई तो उन्हें प्रबंधन ने उसे बताया कि उन्हें विदेश भेजा गया ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें. वह नहीं जानती थी कि उन्हें गोद लेने के लिए दिया गया था. कुछ महीनों के बाद, उसका पति वापस आ गया, और दंपति को एक तीसरा बच्चा हुआ.

नीदरलैंड स्थित एनजीओ अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग से अंजलि पवार ने कहा, जिन्होंने अपने सहयोगी अरुण डोहले के साथ मिलकर नील्सन को उसकी मां का पता लगाने में मदद की उन्होंने बताया जब धनलक्ष्मीव को तीसरा बच्चा हुआ तब उन्होंने अपने बच्चो को अपने पास रखने का मन बना लिया. उन्होंने कहा,'इस बार धनलक्ष्मी ने उन्हें बच्चे को किसी को सौंपने की अनुमति नहीं दी. लेकिन पति फिर से लापता हो गया.'

फरवरी 2013 में नील्सन को कुछ दस्तावेजों मिले जिसके बाद उन्हें पता चला कि उनका एक भाई मैनुअल राजन भी है, जिसे डेनमार्क में गोद लेने के लिए भी दिया गया था. अंजलि पवार ने कहा,'उन्होंने उसका पता लगाया और डीएनए टेस्ट लिया, जिसमें पुष्टि हुई कि वे भाई बहन थे.'

इसके बाद नील्सन ने अपने माता पिता जिन्होंने उन्हें जन्म दिया उसे खोजने की ठान ली इसके लिए उन्होंने चेन्नई में शुरूआत की. मीडिया में जब नील्सन के बारे में लेख छपे तो इन पर पल्लवरम अनाथालय में पादरी की पत्नी और बेटी की नज़र पड़ी और उन्होंने उन्हें धनलक्ष्मी की तस्वीर भेजी.

नील्सन ने अपनी मा की तस्वी को पूरे शहर में लगा दिया उन्हें इस बात की उम्मीद थी कि उनकी मां एक दिन यह तस्वीर जरूर देखेंगी. नील्सन को सफलता तब मिली जब धनलक्ष्मी के रिश्तेदारों ने नीलसन की खोज पर एक टेलीविजन कार्यक्रम देखा और उनसे संपर्क किया. इसके बाद जल्द ही माँ और बेटे ने एक वीडियो कॉल पर बात की.

नील्सन ने कहा,'जब मैं शनिवार को उससे मिला, तो उसने मुझे गले लगाया. मेरी खुशी की कोई सीमा नहीं थी. एकमात्र समस्या भाषा की बाधा थी.' उन्होंने बचपन से अपनी तस्वीरों के साथ एक एल्बम अपनी मा को दिया.' उन्होंने आगे कहा,'मैं चाहता था कि वह मेरे जीवन के हर चरण के बारे में जाने.' नील्सन को यकीन है कि धनलक्ष्मी उनकी मां हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण किया जा रहा है.

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First published: 27 November 2019, 16:08 IST
 
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