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नरक का द्वार: ये खौफनाक रास्ता धरती से सीधे पाताल के रास्ते नरक में जाता है

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2018, 18:33 IST
(Facebook/The earth)

कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है. कुदरत ने कश्मीर को अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य से सजाया है इसलिए वहां लोगों को जन्नत का अहसास होता है. लेकिन धरती पर ऐसा जगह भी मौजूद है जिसे "नरक का द्वार" कहा जाता है. जहां कुदरत ने जमकर कहर बरपाया है और लोग नरक की कल्पना करने पर मजबूर हो जाते हैं. आज से लगभग 47 साल पहले दुनिया के सामने नरक का द्वार प्रकट हुआ.

साल 1971 में सोवियत संघ के वैज्ञिनिकों का एक दल तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में प्राकृतिक गैस की खोज में पहुंचा. वैज्ञिनिकों ने इलाके की खुदाई चालू कर दी और रेगिस्तान के अंदर एक गुफा बनाते जा रहे थे कि तभी जमीन का बड़ा हिस्सा भरभराकर जमीन में धंस गया.

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धसें हिस्से ने लगभग 70 मीटर चौड़े और काफी गहरे गड्ढे का रूप अख्तियार कर लिया और उससे दहकते अंगारे निकलने लगे. आज भी वहां वैसा ही भयावह दृश्य है जो कि नरक के नजदीक होने का अहसास दिलाती है, ऐसा लगता है मानो जहन्नुम के दरवाजे पर खड़े हों. सैलानियों को इसके नजदीक जाने की सख्त मनाही है.

हालांकि बैज्ञानिकों का कहना है कि मिथेन गैस के कारण आग की लपटें जल रही है. साल 2013 में नेशनल जियोग्राफिक के एक शोधार्थी जॉर्ज कोरोउनिस ने नरक के इस द्वार में प्रवेश किया था, उन्होंने पाया कि चट्टानों, पर्वतों, नदियों और समंदरों के किनारे पाया जाने वाला माइक्रोबाइल जीवन गर्म मीथेन गैस वाले वातावरण में भी सांस ले रहा था.

आग के गड्ढे में मिले बैक्टीरिया को लेकर उन्होंने कहा था कि जीवन की खोज करने वालों के लिए यह एक उम्मीद देता है कि ब्रह्मांड में कहीं भी किसी भी परिस्थिति में जिंदगी मौजूद रह सकती है.

First published: 30 July 2018, 18:29 IST
 
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