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पर्यावरण सुरक्षा: यहां बनाया गया प्लास्टिक कचरे को रीसाइकल कर खूबसूरत घर

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 November 2020, 8:28 IST

Recycled Plastic House: प्लास्टिक (Plastic) हमारे पर्यावरण (Environment) को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रही है. ऐसे में इसे नष्ट करने का सबसे अच्छा समाधान इसे रीसाइकल करना है. यानी इस प्लास्टिक को दोबारा से इस्तेमाल करना. क्योंकि प्लास्टिक को समाप्त करने में कई साल लग जाएंगे. बावजूद इसके वह नष्ट नहीं होगी. ऐसे में कई देश इस प्लास्टिक का इस्तेमाल कर सड़कें बना रहे हैं. ये सड़कें इतनी मजबूत होती है कि कई सालों तक इनका कुछ नहीं बिगड़ता. साथ ही लोगों को प्लास्टिक से निजात भी मिल जाती है और हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है.

इसी को देखते हुए ‘प्लास्टिक फॉर चेंज इंडिया फाउंडेशन’ के सहयोग से कर्नाटक के मंगलुरु में प्लास्टिक वेस्ट को रीसाइकल कर एक मकान तैयार किया गया है, जो कर्नाटक का पहला एनवायरमेंट फ्रेंडली ‘रीसाइकल प्लास्टिक हाउस’ है.
बता दें कि इस खूबसूरत घर के निर्माण में 1500 किलोग्राम प्लास्टिक का इस्तमाल किया गया है. यह फाउंडेशन कर्नाटक के सुमुद्री तट के इलाके में कचरा बीनने वालों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी काम कर रहा है. इस संगठन ने हाल ही में कमला नाम की एक महिला के लिए प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste) को रीसाइकल कर एक घर तैयार किया.


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ये घर देखने में जितना सुंदर लगता है वह उतना ही मजबूत भी है. संगठन की सीआईओ शिफरा जेकब्स ने बताया कि, ‘इस घर को बनाने में 1,500 किलोग्राम रीसाइकल प्लास्टिक इस्तेमाल हुआ है. इस मकान के निर्माण में करीब 4.5 लाख रुपये की लागत आई.’ यही नहीं इस मकान को बनाने के बाद इसकी मजबूती और क्वालिटी का भी टेस्ट किय गया है. घर का निर्माण इनोवेटिव और पर्यावरण की दृष्टि से एक टिकाऊ परियोजना के उदाहरण के रूप में किया गया, जिसे बनाने की लागत भी सीमेंटेड घरों के मुकबले बेहद कम है.

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बता दें, घर बानने से पहले निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चीजों की मजबूती और उनकी क्वालिटी का भी टेस्ट (Quality Test) किया गया. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि घर लंबे समय तक टिका रहे और इसमें रहने वालों को किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो. शिफरा ने बताया कि दूसरे चरण में वे 2021 में कचरा बीनने वालों के लिए 20 घर बनाने की उम्मीद कर रहे हैं, जिसमें 20 टन प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा. बता दें कि प्लास्टिक को रीसाइकल कर शौचालय का भी निर्माण किया जा सकता है. गौरतलब है कि यह फाउंडेशन मंगलुरु के कई समुदायों के साथ मिलकर शिक्षा और अन्य तरह के कामों के जरिए लोगों तक मदद पहुंचा रहा है.

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First published: 18 November 2020, 8:32 IST
 
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