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1857 की क्रांति के इस योद्धा के मिले अवशेष, 161 साल से गुमनाम था ये देशभक्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 January 2019, 11:24 IST

भारत की आजादी के लिए देश के कई योद्धाओं ने अपनी जान की बाजी लगा थी. 1857 की क्रांति के दौरान भी कई योद्धा देश को आजाद कराने के लिए शहीद हो गए थे. इनमें से एक थे आलम बेग. आलम बेग एक ऐसे शहीद योद्धा हैं जो इतिहास के पन्नों में कही गुमनाम हो गए. जिनका जिक्र बमुश्किल से आज किया जाता है. भारत मां के इस भक्त के 161 साल बाद अवशेष मिले. इतने दिनों तक गुमनाम रहने वाले इस योद्धा को 1857 की क्रांति के दौरान रानी विक्टोरिया के सामने तोप से उड़ा दिया गया था.

बता दें कि 161 साल बाद आलम बेग की खोपड़ी इंग्लैंड में मिली. इस खोपड़ी से संबंधित अभिलेखों की जब जांच की गई तो पता चला कि वह हवलदार आलम बेग थे, जो विद्रोह कर रही 46 रेजीमेंट बंगाल नॉर्थ इंफ्रेंट्री बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे. इंग्लैंड के वैज्ञानिक वेंगर ने खुलासा किया है कि वह उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले थे.

हालांकि इस खोपड़ी के मिलने के बाद इतिहासकारों ने सवाल उठाए थे. उसके बाद इसकी तफ्तीश की गई. आखिर में इस खोपड़ी पर मुहर लगा दी गई कि ये खोपड़ी स्वतंत्रता सेनानी आलम बेग की ही है. वैज्ञानिक वेंगर व उनके मित्रों ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेएस सहरावत से संपर्क किया और उनके साथ पूरी रिसर्च साझा की. अब प्रो. सहरावत ने उनसे खोपड़ी देने को चिट्ठी लिखी है और उन्हें आश्वासन भी मिला है.

बता दें कि 1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों की हड्डियां अमृतसर के अजनाला में मिली थी. जिन पर प्रो. सहरावत शोध कर रहे हैं. इन्हीं सैनिकों का आलम बेग नेतृत्व कर रहे थे. क्रांति में शामिल 282 सैनिकों में से अकेले हवलदार आलम बेग बचे थे. उन्हें जम्मू के पास रावी नदी पर पकड़ लिया गया. ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर को पता चला कि रानी विक्टोरिया आ रही हैं तो उन्हें आलम बेग का सिर भेंट करने की योजना बनाई.

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First published: 10 January 2019, 11:11 IST
 
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