Home » अजब गजब » From Turkistan to Tibet China capture So Far Six Country
 

चीन ने इन देशों की जमीन पर कर रखा है जबरदस्ती कब्जा, हैरान कर देंगी इससे जुड़ी जानकारियां

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 June 2020, 14:34 IST

रूस (Russia), कनाडा (Canada) और अमेरिका (America) के बाद जो जमीन के मामले में विश्व का सबसे बड़ा देश है उसका नाम चीन (China) है. चीन का कुल एरिया 97 लाख 6 हजार 961 वर्ग किलोमीटर का है. चीन की सीमनाएं 14 देशों से लगती है दो दुनिया के किसी दूसरे देशों के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. लेकिन जानकर हैरानी होगी कि इतने देशों से सीमाएं लगने के बाद भी चीन का अपने पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है. दरअसल, चीन की विस्तारवादी नीति के कारण ये विवाद है, क्योंकि धीरे-धीरे चीन अपने पड़ोसी देशों की सीमाओ पर अपना कब्जा कर रहा है.

चीन पहले इतना विशाल देश नहीं था. मेनलैंड चाइना काफी छोटा था, लेकिन चीन में जब कम्युनिस्ट सरकार बनी उसके बाद चीन ने अपने पैर पसारने शुरू किए. चीन ने पूर्वी तुर्किस्तान (East Turkistan) को अपने कब्जे में ले लिया. अपने कब्जे में लेने के बाद चीन पूर्वी तुर्किस्तान को शिनजियांग प्रांत बताता है. पूर्वी तुर्किस्तान में ही उइगर मुस्लिम ज्यादा हैं. एक अनुमान के अनुसार, उइगर मुस्लिम की आबादी पूर्वी तुर्किस्तान में 45% तक है, जिन पर चीन काफी जुल्म करता है. पूर्वी तुर्किस्तान का एरिया 16.60 लाख वर्ग किलोमीटर है, जो ईरान जैसे बड़े देश की कुल सीमा से भी ज्यादा है.


पूर्वी तुर्किस्तान के बाद चीन ने भारत से सटे तिब्बत (Tibet) के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया. तिब्बत चीन का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है. तिब्बत के कारण ही भारत और चीन के बीच साल 1962 का युद्ध हुआ था.तिब्बत की आबादी का करीब 78 फीसदी बौद्ध हैं. तिब्बत का कुल एरिया 12.28 लाख वर्ग किलोमीटर है जो दक्षिण अफ्रीका से भी बड़ा है.

चीन ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद ही इनर मंगोलिया या फिर दक्षिण मंगोलिया (Inner Mongolia) पर अपना कब्जा कर लिया था. साल 1947 में उसने दक्षिण मंगोलिया को स्वायत क्षेत्र घोषित कर दिया. दक्षिण मंगोलिया का कुल एरिया 11.83 लाख वर्ग किलोमीटर है.

इतना ही नहीं चीन की नजर ताइवान (Taiwan) पर भी है और वो इसे अपना देश बताता है हालांकि, दुनिया के कुछ देशों ने ताइवान को एक अलग मुल्क का दर्जा दिया हुआ है. लेकिन चीन बार बार धमकाता है कि अगर ताइवान अपने आप उसके कब्जे में नहीं जाता है तो वो उसे सैन्य बल पर हथिया लेगा. दूसरी तरफ ताइवान अपने आप को मेन चाइना कहता है. क्योंकि चीन में 1911 के दौरान कॉमिंगतांग की सरकार थी लेकिन उसके बाद वहां गृह युद्ध छिड़ा जिसके बाद माओ त्से तुंग ने कॉमिंगतांग को हरा दिया. कॉमिंगतांग इसके बाद ताइवान चले गए.

चीन का एक उपनिवेश था हॉन्गकॉन्ग (Hongkong) लेकिन 1842 में ब्रिटिशों के साथ हुए युद्ध में चीन उसे हार गया. लेकिन साल 1999 में ब्रिटिशों ने हॉन्गकॉन्ग को चीन को वापस लौटा दिया लेकिन काफी शर्तों के साथ. हालांकि, चीन अब यहं पर भी अपनी दमनकानी नीति अपनाकर इन लोगों के अधिकार छिनना चाहता है और इन्हें अपने हिस्सा बताता है. हॉन्गकॉन्ग की तरह ही एक और उपनिवेश है मकाउ, जिस पर करीब 450 सालों तक पुर्तगालियों ने कब्जा कर रखा था. हालांकि दिसंबर पुर्तगालियों ने मकाउ को चीन को सौंप दिया कुछ शर्तों के साथ.

चीन के कब्जे में भारत की भी भूमि है जो उसने साल 1962 के युद्ध में जीत ली थी. साल 1962 में चीन ने 43 हजार 180 स्क्वायर किमी पर कब्जा जमा रखा है और वो अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार स्क्वायर किमी के हिस्से को भी अपना बताता है. चीन सिर्फ जमीन पर ही नहीं बल्कि सागर पर भी अपना कब्जा कर रहा है. चीन दावा करता है कि दक्षिण चीन सागर उसका हिस्सा है और वो वहां पर जबरदस्त तरीके से अपने पैर पसार रहा है.

जब अमेरिका ने बनाई थी चांद पर परमाणु विस्फोट की योजना, धरती से दिखाई देता भयंकर नजारा

First published: 24 June 2020, 13:22 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी