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यह सबूत बताते हैं कि कल्पना नहीं एक हकीकत है 'रामसेतु'

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 December 2017, 18:25 IST

राम मंदिर पर जिस तरह राजनीति हो रही है, उसी तरह भगवान राम और आस्था के प्रतीक रामसेतु पर नेताओं ने अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकी थीं. यहां तक कि राम मंदिर को महज एक कल्पना बताया था. लेकिन अब जो खबर सामने आई है उससे दूध का दूध पानी का पानी हो गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भूगर्भ वैज्ञानिकों ने इस बात की पुष्टि की है कि आज से हजारों साल पहले भारत और श्रीलंका के बीच एक पुल था. जिसे लोग आज रामसेतु के नाम से जानते हैं.

दरअसल, भूगर्भ वैज्ञानिकों और आर्कियोलॉजिस्ट की टीम ने सैटेलाइट से कुछ तस्वीरें लीं. इन तस्वीरों और सेतु स्थल से प्राप्त बालू और पत्थरों का अध्ययन करने के बाद यह साफ़ किया है कि वहां सेतु का निर्माण हुआ था. यहां तक कि इस टीम से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक सुपर ह्यूमन अचीवमेंट था.

वैज्ञानिकों की रिपोर्ट की मानें तो भारत-श्रीलंका के बीच करीब 30 मील तक बालू की चट्टानें पूरी तरह से प्राकृतिक हैं. साथ ही सेतु पर जो पत्थर मिले वो किसी दूसरी जगह से लाए गए हैं. जो चट्टानें हैं वो करीब सात हजार साल पुरानी हैं जबकि सेतु के पत्थर करीब पांच हजार साल पुराने हैं.

जानकारी के मुताबिक भारत के रामेश्वरम से लेकर श्रीलंका के मन्नार के बीच उथली चट्टानों की 48 किलोमीटर लंबी चेन है. इसी चेन को भारत में रामसेतु और विश्वभर में एडम्स ब्रिज कहा जाता है. जियोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर एलेन लेस्‍टर के मुताबिक हिंदू मान्‍यता के प्रतीक इस सेतु को द्वापर युग में भगवान राम ने बनवाया था.

एक साइंस चैनल ने 'व्हाट ऑन अर्थ एनसिएंट लैंड एंड ब्रिज’ नाम से रामसेतु पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है. जिसमें भूगर्भ वैज्ञानिकों ने सेतु के इस ढांचे के बारे में तमाम बातें बताई हैं.

सनातन धर्म और वाल्मीकि रामायण में इस सेतु के बारे में बताया गया है कि इस सेतु का निर्माण भगवान राम ने अपनी अर्धांगिनी सीता को रावण की कैद से आजाद कराने और श्रीलंका पर विजय प्राप्त करने के लिए किया था. रामायण के मुताबिक भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले देवताओं से आशीर्वाद मांगा था.

इन देवताओं में जल के देवता वरुण भी शामिल थे. इसी बीच श्रीराम ने उनसे समुद्र पार करने के लिए एक रास्ते की मांग की. लेकिन वरुण देवता ने उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया. इसके बाद राम ने अपनी शक्ति से समुद्र को सुखाने के लिए अपने तरकस से बाण निकाला.

इस भय के बाद वरुण देवता प्रकट हुए और भगवान राम से कहा कि आपकी सेना में नल-नील नाम के दो वानर राज हैं. वो अगर किसी भी पत्थर पर आपका नाम लिखकर पानी में डालेंगे तो वो पत्थर तैरने लगेंगे. जब उन्होंने इस प्रक्रिया को किया तो यह सफल हुई और राम ने श्रीलंका पहुंच कर रावण का वध किया.

First published: 12 December 2017, 18:25 IST
 
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