Home » अजब गजब » Giant Hogweed Plant May Cause Blindness, Severe Skin Irritation cause of death
 

Warning: इस पौधे को छूने से चली जाती है आंखों की रोशनी, मौत का भी खतरा...

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2017, 9:45 IST

पेड़ पौधे न केवल हमारे पर्यावरण को हरा भरा और खिला खिला रखते हैं, बल्कि धरती पर जीवन के लिए यह अहम भी हैं. यह वातावरण में ऑक्सीजन और कार्बनडायऑक्साइड का बैलेंस बनाने में सबसे अहम किरदार निभाते हैं.

इसके अलावा हमारे लिए भोजन की व्यवस्था भी इन्हीं पेड़ पौधों से होती हैं. प्रकृति में कई तरह के पेड़ पौधे हैं, कुछ हमें फल, सब्जियां, फर्नीचर के लिए लकड़ी आदि देते हैं, तो कुछ केवल छांव, हालांकि इनमें से कुछ पेड़ हमारे लिए नुकसानदायक भी होते हैं.

यह वो पेड़ होते हैं जिनके फल जहरीले होते हैं, हालांकि एक पौधा ऐसा भी है जिसे छूने भर से ही इंसान की मृत्यु हो सकती है. यह पेड़ किंग कोबरा से भी ज्यादा जहरीला है.

हम बात कर रहे हैं जियानट होगवीड नामक पौधे की, यह गाजर घास की प्रजाति का पौधा है. यह ज्यादा बड़ा तो नहीं होता, लेकिन खतरनाक होता है. होगवीड काफी जहरीला पौधा माना जाता है. यह किलर ट्री के नाम से भी फेमस है. इस खतरनाक और दिखने में बेहद खूबसूरत लगने वाले पौधे का वैज्ञानिक नाम हेरकिलम मेंटागेजिएनम है.

होगवीड पौधा न्यूयॉर्क, पेंनसेल्वेनिया, ओहियो, मेरीलैंड, वॉशिंगटन, मिशिगन और हेम्पशायर में पाया जाता है. इसे छूने भर से हाथों पर छाले या फफोले पड़ जाते हें. इनमें मवाद भरती है. कहा जाता है कि कभी कभी इसे छूने के 48 घंटे के भीतर इसका खतरनाक असर होता है कि लोगों को ठीक होन में कर्इ साल का वक्त लग जाता है.

 

कहते तो यह भी हैं कि इस पौधे को छूने से इंसान की आंखों की रोशनी भी चली जाती है. डॉक्टर्स के मुताबिक अभी तक इन पौधे से शरीर को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कोई सटीक दवा नहीं बन पाई है. हम आपको बताते हैं कि यह पौध इतना जहरीला क्यों होता है.

दरअसल इस पौधे के अंदर सेंसआइजिंग फूरानोकौमारिंस नामक रसायन पाया जाता है. यह सांप के जहर से भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है. अगर आपने इस पेड़ को सहला भी दिया तो कुछ ही घंटों में पूरी त्वचा जलने लगेगी. यहां तक कि अगर आप धूप में गए तो परिणाम और भयंकर हो जाएंगे. कुछ लोग तो होगवीड के संपर्क में आने के लगभग 6 महीने तक धूप में नहीं जा पाए.

First published: 16 September 2017, 9:42 IST
 
अगली कहानी