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अद्भुत: सिर कटने के बाद भी 18 महीने तक दौड़ता-भागता रहा ये मुर्गा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 March 2018, 17:47 IST
(BBC)

अमेरिका में 70 साल पहले एक किसान ने एक मुर्गे का सिर काट दिया, लेकिन वह मरा नहीं बल्कि 18 महीने तक जिंदा रहा, इस बात की जानकारी मुर्गे के मालिक के प्रपौत्र ट्रॉय वाटर्स ने दी है. इस मुर्गे के बारे में ट्रॉय वाटर्स ने कई तरह की जानकारियां दी हैं.

दरअसल, यह घटना 10 सितंबर 1945 की है. इस दिन कोलाराडो में फ़्रूटा के अपने फ़ार्म पर लॉयल ओल्सेन और उनकी पत्नी क्लारा ने करीब 40 या 50 मुर्गे-मुर्गियों को काटा. लेकिन इतने मुर्गे-मुर्गियों को काटने के बाद एक मुर्गा सिर कट जाने के बाद भी जिंदा था.

इस पूरे मामले में ओल्सेन और क्लारा के प्रपौत्र ट्रॉय वाटर्स बताते हैं, "जब अपना काम ख़त्म कर वे मांस उठाने लगे तो उनमें से एक जिंदा मिला जो बिना सिर के भी दौड़े चला जा रहा था." लेकिन उन्होंने उसे सेब के एक बक्से में बंद कर दिया.जब अगले दिन सुबह लॉयल ओल्सेन ये देखने गए कि क्या हुआ तो उसे ज़िंदा पाकर उन्हें बहुत हैरानी हुई.

वाटर्स के अनुसार वह मीट बाज़ार में मांस बेचने के लिए ले गए और अपने साथ उस मुर्गे को भी ले गए, वहीं बाज़ार में उन्होंने इस अजीब घटना पर शर्तें लगानी शुरू कर दी, लेकिन यह बात धीरे-धीरे पूरे फ़्रूटा में फैल गई. इस घटना की जानकारी के लिए एक स्थानीय अख़बार ने ओल्सेन का साक्षात्कार लेने के लिए अपना रिपोर्टर भी भेजा.

इस मामले की जानकारी के कुछ दिन बाद ही एक साइडशो के प्रमोटर होप वेड 300 मील दूर यूटा प्रांत के साल्ट लेक सिटी से आए और ओल्सेन को अपने शो में आने का न्यौता दिया. न्यौता मिलने के बाद वह पहले साल्ट लेक सिटी गए और फिर यूटा विश्वविद्यालय पहुंचे जहां  मुर्गे की जांच की गई. खबरों के अनुसार अफ़वाह उड़ी कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कई मुर्गों के सिर काटे ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह सिर के बिना ज़िंदा रहते हैं या नहीं. इसी समय  उस मुर्गे को होप वेड ने'मिरैकल माइक' का नाम दिया .

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डॉक्टरों की रिपोर्टों के अनुसार माइक की चोंच, चेहरा और आंखें निकल गई थीं, लेकिन स्मल्डर्स का अनुमान है कि उसके मस्तिष्क का 80 प्रतिशत हिस्सा बचा रह गया था, जिससे माइक का शरीर, धड़कन, सांस, भूख और पाचन तंत्र चलता रहा.

लॉयड, क्लारा और माइक पूरे अमेरिका के टूर पर निकल पड़े और वह कैलिफ़ोर्निया, एरिज़ोना और अमेरिका के दक्षिण पूर्वी राज्यों में घूमे. लेकिन ओल्सेन जब 1947 के बसंत में एरिज़ोना के फ़ीनिक्स में पहुंचे तो माइक की मृत्यु हो गई.

माइक को खाने के लिए अक्सर ड्रॉप से जूस दिया जाता था और उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ किया जाता था ताकि गला चोक न हो.  उस रात वे सीरिंज एक कार्यक्रम में भूल गए थे और जब तक दूसरे सीरिंज का इंतज़ाम होता तब तक माइक की दम घुटने से मौत हो गई.

First published: 30 March 2018, 17:22 IST
 
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