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आखिर कैसे हुई थी हिटलर की मौत और क्या था कारण, सालों तक रहस्स्य बनी हुई थी तानाशाह की मृत्यु, दांत से हुआ था खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 November 2020, 12:32 IST

एडोल्फ हिटलर जब तक जिंदा रहा उसने हजारों लोगों को मौत के घाट उतारने के आदेश दिए. हिटलर के आदेशों के बाद लोगों को भयानक यातनाएं देकर मौत के घाट उतारा गया था. हालांकि, हिटलर अपने साथ होने वाले यातनाएं और विरोधी सैनिकों के साथ होने वाली दुर्गति से काफी डरा हुआ था और कहा जाता है कि उसने इसी डर के कारण आत्महत्या करने का मन पहले से ही बना लिया था. कहा जाता है कि जब 29 अप्रैल को इटली के तानाशाह बेनीतो मुसोलिनी और उसकी प्रेमिका को मौत के घाट उतार दिया गया और जनता ने जिस तरीके से उन दोनों लोगों के शवों के साथ बर्बता की थी, उसके बाद तो हिटलर ने अपन पूरा मन बना लिया था कि वो आत्महत्या करेगा.

माना जाता है कि हिटलर ने 30 अप्रैल 1945 को बर्लिन में बंकर के अंदर खुद को गोली मार ली थी और खुद को गोली मारने से पहले हिटलर ने साइनाइड की गोली खाई थी. इसके बाद रूसी आर्मी के एक अफसर ने हिटलर की खोपड़ी उस बंकर से बरामद की थी. हालांकि, कई लोगों का ऐसा भी मानना है कि यह खोपड़ी हिटलर की नहीं थी और हिटलर के लोगों ने उसे बचाने के लिए झूठ बोला था. इतना ही नहीं लोगों का मानना है कि हिटलर कभी भी बर्लिन में अपने बंकर में नहीं मरा था और वो वहां से भाग निकला था. इतिहास कारों में हिटलर की मौत को लेकर एक राय नहीं हैं और इसके कई कारण भी है.


दरअसल, हिटलर की मौत के बाद यूरोप के कई दोशों में ऐसे लोगों की भरमार रही जो यह दावे करते रहे हैं कि उन्होंने हिटलर को देखा है और वो भी 30 अप्रैल और 1945 के बाद. माना जाता है कि हिटलर का कट्टर शत्रु और सोवियत तानाशाह योज़ेफ़ स्टालिन भी ऐसी अफ़वाहों और दावों को हवा दिया करता था कि हिटलर अभी जिंदा है.

सोवियत संघ की गुप्तचर एजेंसी "केजीबी" के साथ साथ अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी सीआईए और एफबीआई भी लंबे समय तक मानती थी कि हिटलर ने कभी आत्महत्या नहीं की थी. इन एजेंसियों ने ऐसे कई लोगों के बयानों को अपनी फाइलों में जगह दी थी जिन्होंने दावा किया गया था कि हिटलर अभी जिंदा है और उन्होंने हिटलर को देखा था. वहीं हिटलर की आत्महत्या के 11 वर्ष बाद जर्मनी में बेर्शतेसगाडन की एक अदालत ने लंबी चली सुनवाई के बाद फैसला दिया था कि 25 अक्टूबर 1956 से हिटलर को मृत माना जाए. हिटलर के निजी सेवक हाइंत्स लिंगे व एड्जुटैंट ओटो ग्युन्शे जैसे जीवित लोगों के बयान सुनने के बाद अदालत ने उसे मृत घोषित करने का फैसला दिया था.

हिटलर की मौत को लेकर एक थ्योरी और भी है. कहा जाता है कि हिटलर ने जिस दिन आत्महत्या की थी उस दिन के तीसरे पहर में करीब साढ़े तीन बजे, हिटलर की नई पत्नी एफ़ा ब्राउन ने बंकर में अंदर उस कमरे में जहर खा लिया था, जिसमें हिटलर काम करता था. दावा किया जाता है कि उस समय हिटलर ने भी साइनाइड की गोली खाकर 7.65 मिलीमीटर की नली वाली अपनी पिस्तौल को दाहिनी कनपटी रख कर अपने सिर में गोली मार ली थी.

इसके बाद उसके निजी सेवक हाइंत्स लिंगे ने उन दोनों के शवों को एक कंबल में लपेटा और नाज़ी पार्टी के दो 'एसएस' सैनिकों की मदद से चांसलर कार्यालय के लॉन में ले जाकर जला दिया. कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इन दोनों के शवों को तब तक पेट्रोल छिड़कर जलाया गया जब तक कि वो पूरी तरह से जल नहीं गए. इसके बाद जो हड्डिया और अवशेष बचे उसे उन्होंने पास के ही एक बंकर पर गिरे बम के कारण बने गड्डे में दफना दिया.

हालांकि, सोवियत सैनिकों के हिटलर के बंकर से एक खोपड़ी बरामद की थी और आज तक इसे हिटलर की खोपड़ी के दावे के साथ ही सहेज कर रखा गया है. इस खोपड़ी में बंदूक का एक सूराख है. साल 2015 में एक अमेरिकी शोध में सामने आया था कि रूस जिसे हिटलर की खोपड़ी बताकर उसे सहेज कर रखे हुए है वो असल में हिटलर की खोपड़ी है ही नहीं बल्कि एक 30 साल की लड़की की खोपड़ी है. अमेरिका की कनेक्टीकट यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविद निक बेलांटोनी ने डीएनए परीक्षण के बाद इस बात की पुष्टी की थी.

दूसरी तरफ साल 2018 में फ्रांस के अनुरोध पर रूस की खुफिया एजेंसी ‘एफ़एसबी’ ने फ्रांस के पांच फ़ोरेंसिक वैज्ञानिकों की एक टीम को मॉस्को आकर वहां रखे हिटलर की खोपड़ी के टुकड़ों और जबड़े की जांच करने की अनुमति प्रदान की. इस टीम ने बाद में दावा किया था कि हिटलर ने मरने से पहले साइनाइड की गोली खाई थी और इसके तुरंत बाद खुद को गोली मार ली थी. टीम ने अपनी जांच में पाया कि उसे जो खोपड़ी दिखाई गई ती उसमें एक हिस्से में छेद था जो संभवतः किसी गोली के कारण बना था. इतना ही नहीं टीम ने दावा किया कि उनको जो दांत दिखाए गए थे, वो भी हिटलक के ही होने चाहिए.

टीम ने इन दांतों को हिटलर की मौत से पहले हुए उसके सिर के एक्स-रे से इसका मिलान किया था जिसमें कोई फर्क नहीं थी. हिटलर के दांतों के अध्यन से पता चला था कि वो मांसाहारी नहीं बल्कि शाकाहारी है. हालांकि, यह टीम यह बता पाने में सफल नहीं हुई थी कि हिटलर की मौत जहर खाने से हुई था या फिर गोली लगने से. फ्रांसीसी टीम की यह खोज ‘यूरोपीयन जर्नल ऑफ़ इन्टर्नल मेडिसिन’ में प्रकाशित भी हुई थी. इस अध्यन के बाद यह साफ हो गया कि शायद हिटलर अपने बंकर में ही मर गया था, लेकिन कुछ लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए. क्योंकि टीम ने उस खोपड़ी या फिर दांत से किसी तरह का कोई सैंपल लेकर यह अध्यन नहीं किया था.

फ्रांसीसी टीम मार्च और जुलाई 2017 में वहां गयी. टीम ने पाया कि जांच के लिए उसे दी गयी खोपड़ी की एक हड्डी में एक छेद था, जो संभवतः किसी गोली से बना होना चाहिये. यानी, हिटलर ने अपने सिर में गोली मारी रही होगी.

First published: 25 November 2020, 12:32 IST
 
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