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जब एक गलती से बनी इतनी जहरीली गैस जिसका इस्तेमाल करने से डर गया था हिटलर!

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2020, 18:53 IST

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के पास मौका था कि वो सेरिन गैस का इस्मेताल करें लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. वास्तव में खतरनाक सेरिन गैस की खोज नाजियों ने ही की थी वो भी गलती से. साल 1938 में जर्मन वैज्ञानिक गरहार्ड स्क्रेडर को जर्मन खेतों और बागों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को मारने के लिए एक सस्ता कीटनाशक बनाने का काम काम सौंप गया था.

गरहार्ड ने फॉस्फोरस को साइनाइड को एक साथ मिलाकर कुछ ऐसा बनाया जो कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग करने के लिए बहुत जहरीला था. इस गैस का इस्तेमाल करने वाले इंसानों की जान जाने लगी और फसल भी मरने लगी. इस वैज्ञानिक की खोज से जर्मन सैनिकों में खुशी की लहर दौड़ गई लेकिन दूसरी तरफ गरहार्ड ने अपनी खोज जारी रखी और और एक ऐसी गैस का खोज किया जिसे सेरिन कहा (Sarin Gas) गया. गैस को यह नाम उसकी टीम में काम करने वाले लोगों के पहले नाम के पहले अक्षर से दिया गया.


ऐसा नहीं था कि हिटलर ने किसी केमिकल गैस का इस्तेमाल करने पर रोक लगाई थी. नाजी कैंपों में लाखों यहूदियों को जहरीली गैस देकर ही मारा गया था. इतना ही नहीं प्रथम विश्व युद्ध में भी जहरीली गैस का इस्तेमाल हो चुका था. लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि जर्मन सैनिकों के बहुत जोरदेने के बाद भी हिटलर ने इस गैस का इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी थी.

दरअसल, कुछ इतिहास कारों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान एक सैनिक के रूप में हिटलर ने स्वयं के अनुभवों के आधार पर इस गैस के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी थी. जर्मनी ने 1915 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फ्रांसीसी सैनिकों पर क्लोरीन गैस का इस्तेमाल किया था. इस दौरान ब्रिटेन और फ्रांस ने भी क्लोरीन और मस्टर्ड गैस का उपयोग किया था.

हिटलर के जीवन पर लिखी किताब में इतिहासकार इयान केरशॉ ने लिखा है कि 1918 में 13-14 अक्टूबर रात को हिटलर जो उस दौरान सैनिक था वो मस्टर्ड गैस से हुए हमले का शिकार हुआ था. इस दौरान वो आंशिक रूप से अंधा हो गया था और वो मुश्किल से अपनी जान बचा पाया था. इस हमले के बाद हिटलर को फ्लैंडर्स से पोमेरानिया के एक सैन्य अस्पताल में ले जाया गया, जहां उसे प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार का पता चला.

हालांकि, गैस के इस्तेमाल ना करने के पीछे एक और कहानी बताई जाती है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, चर्चिल रासायनिक हथियारों का उपयोग करने के लिए तैयार थे, लेकिन केवल उस स्थिति में अगर दुश्मन ने पहले केमिकल से हमला किया हथियार. फरवरी 1943 में, जब लंदन को पता चला कि जर्मन डोनेट बेसिन में रूसियों के खिलाफ गैस का इस्तेमाल कर सकते हैं, चर्चिल ने अपने चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी को लिखा," अगर जर्मनी रूसियों पर गैस का इस्तेमाल करता है तो ऐसी स्थिति में... हम जर्मन शहरों पर जितनी हो सके उतनी अधिक मात्रा में गैसा का इस्तेमाल करेंगे." भले ही कोई भी कारण रहा हो लेकिन हिटलर ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस गैस के इस्तेमाल पर रोक लहा रखी थी.

सेरिन गैस कितनी खतरनाक हो सकती है इसका अंदाजा लगाना चाहते हैं तो सीरिया का उदाहरण ले सकते हैं जब सीरियाई सेना पर आरोप लगे कि उसने विद्रोहियों पर सेरिन गैस से अटैक किया था. इस दौरान काफी भयावह तस्वीरें सामने आई थी जिसके देखकर दुनिया कांप गई थी.

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First published: 25 May 2020, 18:13 IST
 
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