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जब गांधी जी हो गए थे फ्लू से संक्रमित, हुई थी करोड़ों लोगों की मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 March 2020, 21:24 IST

कोरोना वायरस के कारण अभी पूरे विश्व में भय का माहौल है. चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस के कारण 15 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि तीन लाख से अधिक लोग इस वायरस के कारण अपनी जान गंवा चुके है. इस वायरस के कारण कई शहरों में लॉक डाउन की स्थिति है. बात अगर भारत की करें तो यहां पर इस वायरस के कारण सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 400 से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके है. ऐसा पहली बार नहीं है जब भारत में किसी वायरस या फिर फ्लू के कारण लोगों की मौत हुई हो. दस्तावेजों को उठाकर देखें तो एक ऐसा समय भी आया था जब भारत में एक फ्लू के कारण दो करोड़ से अधिक लोगों की मौत हो गई थी. यह बात साल 1918 की है उस दौरान गांधी जी भी वायरस से संक्रमित हुए थे.

कहा जाता है कि साल 1918 में बॉम्बे में सैनिकों का एक जहाज लौटा था जिससे ही यह फ्लू पूरे भारत में फैल गया. उसके बाद उसी साल दक्षिण भारत के उन राज्यों में यह फ्लू तेजी से फैला था जो तटीय क्षेत्र से जुड़े हुए थे. इंफ्लुएंजा के कारण भारत में तब दो करोड़ लोगों की मौत की बात कही जाती है. बताया जाता है कि इस फ्लू में मरने वालों में ज्यादा तर महिलाएं थी. इंफ्लुएंजा के कारण एक तिहाई आबादी प्रभावित हुई थी बताया जाता है कि करीब 10 करोड़ से अधिक लोग इस फ्लू का शिकार हुए थे.

जुलाई 1918 की शुरुआत तक लगभग 230 लोग हर दिन बीमारी से मर रहे थे जो जून के अंत से तीन गुणा अधिक थे. टाइम्स ऑफ इंडिया ने तब इस वायरस केलक्षण के बारे में लिखा,'मुख्य लक्षण उच्च तापमान और पीठ में दर्द है और शिकायत तीन दिनों तक रहती है. बंबई में लगभग हर घर में लोगों को बुखार की शिकायत है.' यूरोपीय लोगों की तुलना में भारत में जवान व्यक्ति और बच्चे संक्रमित थे. 

हिंदी के मशूहर कवि सुर्यकांत त्रिपाठी निराला की पत्नी और उनके घर के दूसरे सदस्य इस बीमारी का शिकार हुए थे कहा जाता है कि उस दौरान गंगा नदी के किनारें शवों से पट गए थे. चारों तरफ सिर्फ लाशें ही लाशें दिखाई दे रही थी.

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First published: 23 March 2020, 21:24 IST
 
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