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गजब: इस गांव में पत्नी के प्रेंग्नेंट होने पर पति कर लेता है दूसरी शादी, पत्नी भी दे देती है इजाजत

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 May 2018, 12:10 IST

यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लग सकती है पर ये सच है कि देश में कई ऐसे गांव है, जहां लोग एक बल्कि दो-दो शादियां करते हैं. लेकिन इनमें जो इससे भी हैरान करने वाली बात है, वो ये की ये शादियों पहली या फिर दूसरी पत्नी के मर्जी से होती है. जी हां आपने बिल्कुल सही पढ़ा. आज भी हमारे देश में कई ऐसे गांव हैं.

उदाहरण के लिए राजस्थान के बाड़मेर जिले का देरासर गांव जहां के लोग अपनी पहली पत्नी के गर्भवती होने के बाद दूसरी शादी कर लेते हैं. जी हां, ये पढ़कर आपको अजीब जरुर लगा होगा कि कोई अपनी पत्नी के गर्भवती होने पर दूसरी शादी के बारे में कैसे सोच सकता है? पर इससे भी चौकाने वाली बात ये है कि उन लड़कियों को भी शादी के पहले दिन से यह पता होता है कि ये दिन जरूर आएगा!

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दरअसल राजस्थान के बाड़मेर ज़िले के देरासर गांव में पानी की बड़ी समस्या है. यहां पानी की इतनी किल्लत है कि घर की औरतों को चाहें तपती गर्मी हो या कंपकपाती ठंड पूरा-पूरा दिन पानी की खोज में मीलों भटकना पड़ता है. यही नहीं यहां पैदा हुई लड़कियों को बचपन से ही पानी ढ़ो कर लाना सिखाया जाता है. ताकि वे जब थोड़ी बड़ी हो तो आराम से दो-तीन घड़े ढ़ो कर चल सकें.

 

ऐसे में जब इस गांव कि कोई महिला गर्भवती होती है. तो उन घरों में पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है. इस समस्या से निपटने के लिए गर्भवती महिला का उस महिला की रजामंदी से पति दूसरी शादी कर लेता है.  ताकि पानी लाने की ज़िम्मेदारी दूसरी पत्नी उठाए और साथ ही पहली पत्नी का ख्याल रख सके.  

राजस्थान का देरासर भारत के ऐसे गांवों में से एक है जहां 'बहुविवाह' की प्रथा सालों से चली आ रही है. दरासर के अलावा महाराष्ट्र में भी ऐसे कई गांव हैं जहां पानी की किल्लत की वजह से पुरुषों को बहुविवाह करना पड़ता है. बहुत से इलाकों में पानी की इतनी समस्या है कि यहां के लोगों को पानी के लिए कई-कई गांव पार करने पड़ते हैं जिसमे 10 से 12 घंटे लग जाते है. महाराष्ट्र में ऐसे लगभग 19,000 सूखाग्रस्त गांव हैं. दूसरी पत्नियों को इन गांव में 'वाटर वाइव्स' (पानी की पत्नियां) या 'वाटर बाईस' (पानी की बाई) कह कर सम्बोधित किया जाता है.

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ऐसे गांवों में कई बार अधिकारी लोग भी बहुबिवाह नहीं रोक पाते. क्योंकि यहां बहुविवाह पहली या दूसरी पत्नी की मर्जी से ही होते हैं. इस दिशा में सरकार को पानी की उपलब्धता और लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए कड़े और जरूरी कदम उठाने होंगे. वर्ना एक के बाद एक इस तरह प्रथाएं बनती जाएंगी, जो महिलाओं के विकास और समाज में उनकी स्थिति को बद से बदत्तर कर देंगे.

First published: 31 May 2018, 12:10 IST
 
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