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भारत का सबसे शातिर चोर जिसने बेच दिया था ताजमहल से लेकर संसद भवन तक

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2020, 9:38 IST

क्या आपने कभी सोचा कि कोई व्यक्ति ताजमहल, लाल किला (Lal Qila) और संसद भवन (Parliament House) खरीद सकता है ? इससे बड़ा सवाल है कि कोई व्यक्ति क्या ताजमहल जैसे राष्ट्रीय धरोहर बेच सकता है. हालांकि, भले ही आपको विश्वास ना हो लेकिन एक शख्स ऐसा था, जिसने अपनी चतुराई से ताजमहल (Taj Mahal) को बेच दिया था और उसने जिसे बेचा उसे विश्वास दिलाया कि वो सचमुच में ताजमहल का मालिक बनने वाला है.

बिहार (Bihar) के सीवान जिले के बंगरा गांव का रहने वाले मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ( Mithilesh Kumar Srivastava) पेशे से वकील थे और जब उसने लोगों को ठगने का काम शुरू किया तब तक वो वकील का काम करता रहा. मिथिलेश कुमार लोगों को चूना लगाने के लिए अपना नाम बदलता था, कहा जाता है कि उसने करीब 50 फर्जी नामों का इस्तेमाल किया था और उसने जिन लोगों को ठगा उसमें टाटा, बिड़ला, मित्तल और अंबानियों जैसे प्रमुख लोग भी शामिल रहे.


देश के ऐतिहासिक स्थलों को बेचने पर अपनी दृष्टि स्थापित करने से पहले उन्होंने प्रसिद्ध हस्तियों के हस्ताक्षर बनाने की कला में महारत हासिल की थी. सभी को आश्चर्यचकित करते हुए, उसने 545 सदस्यों के साथ सदन को, ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन को सफलतापूर्वक बेच दिया था.

मिथिलेश को भारत भर के 8 राज्यों की पुलिस तलाश कर रही थी और उसके ऊपर इन राज्यों में 100 से अधिक मामलों चल रहे थे. उसे इन मामलों में 113 साल की जेल हुई थी. इसमें से उन्होंने मुश्किल से 20 साल की कैद की. उसे नौ बार पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था, और हर बार वो भागने में सफल हुआ. एक घटना में, उसने एक पुलिस-अधिकारी की वर्दी चुराई और उसे पहनकर वो बड़े ही आसानी से जेल से बाहर आ गया था. उसे आखिरी बार 1996 में पकड़ा गया था तब उसकी उम्र 84 साल की थी, लेकिन इस बार भी वो भागने में सफल हुआ था.

कहा जाता है कि जब उसे आखिरी बार गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद उसे कानपुर जेल से एम्स अस्पताल में पुलिस एस्कॉर्ट के तहत इलाज के लिए ले जाया जा रहा था, जब वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर गायब हो गया, फिर कभी दिखाई नहीं दिया. मिथिलेश की मौत कैसे हुई, यह अभी भी रहस्य है, कुछ लोगों का दावा है कि उसकी मृत्यु 25 जुलाई 2009 को हुई थी, जबकि उनके भाई गंगा प्रसाद श्रीवास्तव ने 1996 में रांची में उनका अंतिम संस्कार करने का दावा किया था.

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First published: 27 July 2020, 9:30 IST
 
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