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इस किले को नहीं जीत पाया था कोई, तोप के गोले भी हो जाते थे बेअसर

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 September 2019, 13:12 IST

हमारे देश में ऐसे तमाम किले हैं जिनके बारे में तमाम कहानियां भी प्रचलित हैं इनमें से ज्यादातर सच कहानियां ही हैं. ऐसा ही एक लिका राजस्थान के भरतपुर में भी है, जिसे लौहगढ़ या लोहागढ़ का किला कहा जाता है. इस किले को देश का एकमात्र अजेय दुर्ग कहा जाता है, क्योंकि इसे कभी कोई जीत नहीं सका. यही नहीं इस किले पर अंग्रेज भी कभी हमला कर सफल नहीं हुए. बताया जाता है कि इस किले पर तोप के गोले भी बेअसर हो जाते थे.

बता दें कि इस किले का निर्माण जाट शासक महाराजा सूरजमल ने 285 साल पहले यानी 19 फरवरी, 1733 को करवाया था. उनदिनों तोप और बारूद का प्रचलन ज्यादा था. हमलावर तोप और बारूद से बड़ी से बड़ी इमारतों पर धावा बोलकर नष्ट कर देते थे और फिर अपना अधिकार कर लेते थे. इसी के चलते इस किले को बनाने के लिए एक विशेष तरह का प्रयोग किया गया था, जिससे कि बारूद के गोले भी किले की दीवार से टकराकर बेअसर हो जाएं.

इस किले के निर्माण के समय पहले एक चौड़ी और मजबूत पत्थर की ऊंची दीवार बनाई गई थी. इन पर तोप के गोलों का असर नहीं होता था, इसके लिए इन दीवारों के चारों ओर सैकड़ों फुट चौड़ी कच्ची मिट्टी की दीवार बनाई गई और नीचे गहरी और चौड़ी खाई बना कर उसमें पानी भरा गया था. ऐसे में अगर दुश्मन पानी को पार कर भी गया तो सपाट दीवार पर चढ़ना उसके लिए काफी मुश्किल होता था.

इसीलिए हर आक्रांता इस किले पर आक्रमण कर खुद को ठगा सा महसूस करता था. क्योंकि तोप से निकले हुए गोले गारे से बनी दीवार में धंस जाते थे और उनकी आग शांत हो जाती थी. इससे किले को कोई नुकसान पहुंचता ही नहीं था. और दुश्मन को बेरंग वापस लौटना पड़ता था.

कहा जाता है कि इस किले पर कब्जा जमाने के लिए अंग्रेजों ने 13 बार आक्रमण किया था. अंग्रेजी सेना ने यहां सैकड़ों तोप के गोले बरसाए थे, लेकिन उन गोलों का किले पर कोई असर नहीं हुआ. उनकी कोई भी तोप किले की दीवार को भेद नहीं सकी. कहा जाता है कि अंग्रेजों की सेना बार-बार हारने से हताश हो गई उसके बाद वह वापस चली गई. अंग्रेज इतिहासकार जेम्स टाड कहते थे कि इस किले की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारें ही थीं, जो मिट्टी से बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद इस किले को फतह करना लोहे के चने चबाने से कम नहीं है.

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First published: 4 September 2019, 13:12 IST
 
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