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इजरायल के वैज्ञानिकों ने खोजा ऐसा बैक्टीरिया जो कार्बन डाइऑक्साइड खाकर बनाएगा चीनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2020, 21:05 IST

इजरायल के वैज्ञानिकों ने 10 साल की खोज के बाद एक ऐसा बैक्टीरिया बनाया हैं जो हमारे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड खाएगा और चीनी प्रोड्यूस करेगा. वैज्ञानिकों ने बीते साल ही इस बैक्टीरिया केबारे में दुनिया को बताया था लेकिन तब वो सिर्फ बैक्टीरिया की शुगर पर निर्भरता खत्म करने मेें सफल हो पाए थे लेकिन करीब एक साल बाद वैज्ञानिकों ने इस बैक्टीरिया को कुछ इस तरह प्रोग्राम किया कि ये कार्बन डाइऑक्साइड खाए और शक्कर का निर्माण करे. गौरतलब हो, वेइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने यह खोज कि है. इजरायल के तेल अवीव में स्थित यह प्रयोगशाला 1934 में डैनियल सीफ इंस्टीट्यूट के रूप स्थापित हुई थी. इस प्रयोगशाला में दुनिया में प्राकृतिक और सटीक विज्ञान में खोज करने के लिए नंबर वन रिसर्च सेंटर्स में माना जाता है.

जर्नल सेल में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने ई-कॉली बैक्टीरिया को एक दशक चली लंबी प्रक्रिया में बैक्टीरिया को चीनी कंज्यूम करने से पूरी तरह हटाया गया. इसके बाद उन्होंने इसकी री-प्रोग्रामिंग की जो सफल रही. यानि ई-कॉली बैक्टीरिया जो पहले शक्कर खाते थे और कॉर्बन डाइऑक्साइड को प्रोड्यूस करते थे. वैज्ञानिकों ने एक दशक के अंदर बैक्टीरिया की इस प्रोसेस को एकदम उलटा करने में सफलता पाई. अब ये बैक्टीरिया कॉर्बन डाइऑक्साइड कंज्यूम करके शुगर का निर्माण करने लगे है. रिपोर्ट के अनुसार, बैक्टीरिया अपनी बॉडी का निर्माण पर्यावरण में मौजूद कॉर्बन डॉइऑक्साइड से करेंगे और उसके बाद वो शुगर प्रड्यूस करेंगे.

वैज्ञानिकों को उम्मीद हैं कि ये बैक्टीरिया हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड खाएंगे जिससे आने वाले दिनों में उन्हें(वैज्ञानिकों को)ग्रीनहाउस गैस के संचय को कम करने के लिए तकनीक विकसित करने में और अधिक मदद मिलेगी. इतना ही नहीं यह बैक्टीरिया ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते खतरे को कम करने में भी मददगार होंगे.

जर्नल सेल में प्रकाशित एक साल पहले की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का जीन तैयार किया था जिसके बाद उसे लैब में बैक्टीरिया के जीनोम में डाला गया था. इकसे बाद वैज्ञानिकों ने धीरे धीरे करके बैक्टीरिया को शुगर से अगल किया जाने लगा और आखिरकार बैक्टीरिया कार्बन डायऑक्साइड पर निर्भर हो गए.

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First published: 2 January 2020, 20:51 IST
 
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