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इस देश में एक सेकेंड भी ट्रेन लेट हो जाए तो अफसरों को मांगनी पड़ती है माफी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2018, 16:21 IST

हमारे देश में ट्रेन का लेट होना आम बात मानी जाती हैै. लेकिन जापान में ऐसा बिल्कुल नहीं है. जापान की ट्रेनों के समय को लेकर कई बातें बताई जाती हैं. कहा जाता है कि जापान के लोग ट्रेनों के आने जाने से अपनी घड़ियों का समय मिलाते हैं. हालांकि जापान में भी कई बार तकनीकी गड़बड़ी के चलते ट्रेन लेट हो जाती हैं.

जो ना तो घंटों में होती है और ना ही मिनटों, बल्कि कुछ सेकंड में ही होता है. बताया जाता है कि जापान की बुलेट ट्रेन शिन्कासेन का रिकॉर्ड है कि वह कभी 36 सेकंड से ज्यादा लेट नहीं हुई. ट्रेनों के सही समय पर चलने के पीछे रेलवे की तकनीकी और स्टाफ की काम के प्रति प्रतिबद्धता बताई जाती है.

ट्रेन के लेट होने पर मिलता है प्रमाणपत्र

जापान के लोग समय के बहुत पाबंद होते हैं. हर डिपार्टमेंट में एक मिनट की देरी को भी गंभीरता से लिया जाता है. चाहे वो सरकारी हो या प्राइवेट. कभी ऐसा भी होता है कि कोई ट्रेन कुछ सेकंड लेट हो जाती है, तो अगले स्टेशन पर उनकी दूसरी ट्रेन छूट जाती है. इसलिए वे और ज्यादा लेट हो जाते हैंइसके लिए जापान रेलवे यात्रियों को सर्टिफिकेट देता है.

यात्रियों को सर्टिफिकेट देने के बारे में www.japanallover.com वेबसाइट में डिले सर्टिफिकेट के बारे पूरी जानकारी दी गई है. बता दें कि जब ट्रेन लेट होती है तो स्टेशन पर रेलवे का स्टाफ खड़ा हो जाता है और यात्रियों को डिले सर्टिफिकेट देता है. जिसे यात्री अपने दफ्तर में दिखाते हैं तो उन पर देरी से आने पर कोई कार्रवाई नहीं होती.

 

यात्रियों से अफसर मांगते हैं माफी

ट्रेन के देरी होने पर हमारे देश में रेलवे के अधिकारी भले ही सफाई देते हों, लेकिन जापान के रेलवे के अधिकारी ट्रेन के लेट होने पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं. द गार्जियन की खबर के मुताबिक पिछले साल नवंबर में टोक्यो और राजधानी के उत्तरी इलाके को आपस में जोड़ने वाली सुकुबा एक्सप्रेस लाइन पर एक ट्रेन 9:44:40 के बजाए 9:44:20 बजे खुल गई.

ट्रेन के मात्र 20 सेकंड पहले चलने जाने पर कुछ यात्रियों की ट्रेन छूट गई वहीं अगले स्टेशन पर कुछ यात्रियों को ट्रेन का इंतजार करना पड़ा. इस घटना पर रेल अधिकारियों ने अपनी वेबसाइट पर माफी मांगी. सुकुबा एक्‍सप्रेस कंपनी ने कहा, ‘यात्रियों को हमारी वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा इसके लिए हमें खेद है.’

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First published: 9 May 2018, 16:21 IST
 
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