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पाकिस्तान का वो सीलियर किलर जिसने 100 बच्चों को उतारा था मौत के घाट, मिली थी रूह कंपा देने वाली सजा

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 May 2020, 0:10 IST
Javed Iqbal

आपने आज तक कई सीरियल किलर के बारे में सुना होगा, जिन्होंने बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतारा, लेकिन पाकिस्तान के एक सीरियल किलर को सबसे खूंखार और सबसे खतरनाक कहा जाता है. इस सीरियल किलर ने पाकिस्तान में 100 बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी. इस हत्यारे के नाम से पूरी दुनिया कांपती है और इसका नाम जावेद इकबाल है.जावेद इकबाल ने पाकिस्तान में 100 बच्चों को मौत के घाट उतारा लेकिन हैरानी वाली बात यह थी कि उसने 100 से ना एक कम और ना ही एक ज्यादा बच्चे को मारा और इन मासूम बच्चों को मारने के बाद इस व्यक्ति ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया.

दिसंबर 1999 में, लाहौर के एक उर्दू अखबार के संपादक को एक पत्र मिला जिसमें लिखा था,"मेरा नाम जावेद इकबाल है और मैंने 100 बच्चों की हत्या की है और उनके शरीर को तेजाब से गला घोंट दिया है." उसने पत्र में यह भी बताया था कि उसने जिन बच्चों की हत्या की, उनमें से ज्यादातर अनाथ थे.


उसने लाहौर पुलिस को भी इसी तरह का एक पत्र भेजा था, जिसमें उसने अपना अपराध कबूल कर लिया था और उसने उस जगह के बारे में भी बताया था जहां उसने बेगुनाह बच्चों को मौत के घाट उतारा था. हालांकि पुलिस ने इस व्यक्ति के पत्र को गंभीरता ने नहीं लिया था लेकिन उस अखबार के संपादक ने लिया और उन्होंने अपने एक रिपोर्टर को उस बताए पते पर भेजा था. जब पत्रकार वहां गया, तो घर के अंदर खून के निशान थे, दो बड़े बैग में बच्चों के जूते और कपड़े भरे हुए थे, इतना ही नहीं वहां पर एक डाय़री भी थी जिसमें बच्चों के नाम और उनके बारे में जानकारी लिखी हुई थी.

वहीं घर के बाहर भी हाइड्रोक्लोरिक एसिड से भरे दो कंटेनर थे, जिसमें बच्चों की हड्डियों को रखा गया था. यह सब देखने के बाद पत्रकार तुरंत अपने कार्यालय पहुंचा और उसने संपादक को सारी बातें बताईं. इसके बाद, पुलिस को सूचित किया गया. सूचना मिलने पर पुलिस टीम जावेद इकबाल के ठिकाने पर पहुंची, जहां उसने हत्या के सभी सबूत बरामद किए. इसके अलावा, पुलिस को एक नोटबुक भी मिली, जिसमें से चिट्ठी में लिखी सारी बातें लिखी हुई थीं और यह भी लिखा था कि हत्या के सबूत के तौर पर मैंने कुछ लाशें छोड़ी थीं, जो मुझे नहीं मिलीं. उन्होंने नोटबुक में लिखा कि मैं रावी नदी में कूदकर आत्महत्या करने जा रहा हूं. इसके बाद पुलिस ने तुरंत तलाशी अभियान शुरू किया और रावी नदी के कोने की तलाशी ली, लेकिन जावेद का शव कहीं नहीं मिला. यह पाकिस्तान के इतिहास में सबसे बड़ा खोज अभियान था.

इस मामले की जांच के दौरान, पुलिस ने जावेद के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ शुरू की लेकिन पूछताछ के दौरान, उनमें से एक ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली. इसी दौरान जावेद उसी उर्दू अखबार के कार्यालय में पहुंचा, जहाँ उसने पहले पत्र भेजा था. जावेद ने संपादक से मुलाकात की और एक इंटरव्यू के लिए कहा और इंटरव्यू खत्म होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. वहीं पुलिस ने जब जावेद से पूछताछ की तो उसने जो कहा उसे सुनकर ससभी हैरान रह गए.

पुलिस पूछताछ के दौरान जावेद ने बताया कि जब वह 20 साल का था, तो उसे बलात्कार के आरोप के बाद जेल भेज दिया गया था, लेकिन उसने वह अपराध नहीं किया था और उसे एक साजिश के तहत फंसाया गया था. इस दौरान उनकी माँ हमेशा जेल में उनसे मिलने जाया करती थीं, लेकिन एक दिन बेटे की रिहाई के इंतज़ार में उनकी माँ की मृत्यु हो बाद, गई जिसके उन्होंने कसम खाई कि जैसे उनकी माँ ने रोते हुए अपनी जान गंवा दी, वैसे ही 100 माएं रोएंगीय इसके बाद उसे मारने का सिलसिला शुरू किया. जावेद को अक्टूबर 2001 में फांसी की सजा हुई.

हालांकि, पहले जावेद को ऐसी सजा मिली थी कि उसके बारे में सुनकर लोगों की रूह कांप जाए. जज ने जावेद को 100 बच्चों के मारने के जुर्म में 100 बार गला घोटकर मारने फिर उसके शरीर के 100 छोटे-छोटे टुकड़े करने उसे एसिड में जला देने की बात कही थी. लेकिन दुनिया भर के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया जिसके बाद जावेद को फांसी की सजा मिली थी.

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First published: 24 May 2020, 23:53 IST
 
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