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'मौत का देवता': हिटलर का वो खतरनाक 'हथियार' जो लोगों पर करता था खतरनाक प्रयोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 February 2020, 17:15 IST

डॉ जोसेफ मेंगले एक कुख्यात नाजी डॉक्टर जिसे ऑशविट्ज कैंप में पोस्टिंग मिली थी. यहां पर हिटलर की सेना द्वारा बंदी बना कर लाए गए लोगों पर जोसेफ मेंगले उल्टे सीधे प्रयोग करता था. हालांकि जो लोग ऑशविट्ज कैंप में लाए जाते थे उनकी पहले छटनी की जाती थी जो लोग काम करने मेंसक्षम होते थे उन्हें अलग रखा जाता था और जो लोग किसी काम के नहीं होते थे उन्हें गैस चेंबर में मरने के लिए छोड़ दिया जाता था.

डॉ जोसेफ मेंगले का सबसे क्रूर रूप यही देखने को मिलता है. कहा जाता है कि ऑशविट्ज कैंप में जो आए थे उनकी छटनी होने के बाद मेंगले यहूदी कैदियों पर प्रयोग करता था. मेंगले ने डॉक्टरी की पढ़ाई की थी ऐसे में उसने चिकित्सा उपचार की आड़ में या तो खुद लोगों को इंजेक्शन लगाया या दूसरों को इंजेक्शन लगाने का आदेश दिया. आपको जानकर हैरानी होगी कि इन इंजेक्शन में पेट्रोल से क्लोरोफॉर्म तक सब कुछ मिला हुआ होता था. बताया जाता है कि एक बार उसने उन्होंने आंखों की अनुवांशिकता का अध्ययन करने के लिए एक बार एक कैदी की आंख निकाल ली थी

कहा जाता है कि जुड़वा बच्चों पर अनुवांशिकता के प्रभाव का अध्यन करने के लिए उसने कई प्रयोग किए थे. इतना ही नहीं वो गर्भवती महिलाओं पर भी अध्यन करता था. कहा जाता है कि प्रयोग के दौरान वो नोट्स बनाता था. अगर इस दौरान उस बच्चे की मौत हो जाती तो वो दूसरे बच्चे को भी क्लोरोफॉर्म का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला देता था.

डॉ जोसेफ मेंगले जो लोगों को यातनाएं देता था उसे देखकर उसे प्रमोशन दिया गया और कैंप का मैनेजर बना दिया गया. इसके बाद तो वो और क्रूरता पर उतर आया और उसका जो मन करता था वो वहीं करने लगा. कहा जाता है कि एक बार जिप्सियों से भरे इस कैंप में नोमा नामक एक खतरनाक बीमारी फैल गई थी. डॉ जोसेफ मेंगले को समझ नहीं आ रहा था आखिर इसका कारण क्या है तो इसीलिए उसने एक बार फिर इन लोगों पर प्रयोग चालू किए और इन लोगों के मरने के बाद उनकी इन लाशों की खोपड़ी खोलकर उस पर तरह तरह के प्रयोग करता था


हालांकि साल 1945 की शुरूआत में जब मित्र देशों की सेनाओं नेऑशविट्ज कैंप बुरी तरह से नष्ट करना शुरू कर दिया तो जोसेफ अपनी जान बचा कर वहां से भागने में सफल हुआ. इस दौरान उसने अपनी सभी रिसर्च को इक्कठा किया और उसे अपने एक दोस्त को सौंप दिया.

कहा जाता है कि मित्र देश की सेना से बचने के लिए जोसेफ कई देशों में अपना नाम बदल कर छुपने में कामयाब रहा. इस दौरान वो ब्राजील, अर्जेंटीना और पराग जैसे देशों में अपने दुश्मनों की नज़रों से बचता रहा. हालांकि एक दिन ब्राजील से उसकी मौत की खबर आई. कहा जाता है कि साल 1979 में मेंगले अटलांटिक महासागर में तैराकी के लिए गया था जहां पानी में डूबने के कारण उसकी मौत हो गई थी. हालांकि उसकी मौत के बाद कई सालों तक इसका खुलासा नहीं हुआ था. साल 1985 में जब कुछ खोजकर्ताओं की एक टीम जोसेफ की तलाश में ब्राजील गई तब उन्होंने वहां पर ग्रहार्ड नाकर एक व्यक्ति की क़ब्र खोजी, जिसे बाद में टेस्ट के बाद प्रमाणित किया गया कि यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि 'मौत का देवता' था.

First published: 7 February 2020, 16:10 IST
 
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