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इस गांव में रहने वाला हर शख्स हो जाता है मालामाल, कामना करने से दूर हो जाती है गरीबी

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 November 2018, 13:24 IST

अपनी जिंदगी में पैसे कमाने के लिए लोग ना जाने क्या-क्या करते हैं. वो पूरी जिंदगी जी तोड़ मेहनत करते हैं फिर भी उन्हें सफलता नहीं मिलती, लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसा गांव है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां रहने वाले लोगों की किस्मत चमक जाती है. ऐसा कहा जाता है कि इस गांव में रहने वाले हर इंसान की गरीबी दूर हो जाती है.

ये गांव पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चमोली जिले में मौजूद है. इस गांव का नाम है माणा. इस गांव को शापमुक्त होने का दर्जा भी प्राप्त है. माणा गांव को भारत का आखिरी गांव भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि माणा गांव पर भगवान शिव की ऐसी महिमा है कि यहां आने पर हर किसी की गरीबी दूर हो जाती है. यही नहीं लोगों का ऐसा मानना है कि इस गांव में रहने वालों को पापों से  मुक्ति मिल जाती है.

इस गांव पर है भगवान की कृपा

चमोली जिले में स्थित माना गांव के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस गांव पर भगवान की कृपा है. इसी गांव के होकर भारत और तिब्बत के बीच व्यापार भी होता है. बता दें कि ये गांव बद्रीनाथ धाम से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है. इसीलिए ऐसा माना जाता है कि इस गांव पर भगवान शिव की कृपा है. इसीलिए इस गांव का नाम भगवान शिव के भक्त मणिभद्र के नाम पर पड़ा है. इतिहासकारों के मुताबिक, इस गांव में आने के बाद इंसान स्वप्नद्रष्टा हो जाता है. यहां आने के बाद वो अपने जीवन में होने वाली घटनाओं को अनुभव करने लगता है.

प्राचीन मान्यताओं के मुताबिक, कहा जाता है कि एक बार माणिक शाह नाम का व्यापारी अपने काम से कहीं जा रहा था. वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. रास्ते में लुटेरों ने उसका गला काटकर उसे लूट लिया. गर्दन कटने के बाद भी उसके मुंह से भगवान शिव की प्रार्थना निकलती रही. अपने भक्त की भक्ति देखकर भगवान शंकर ने उसके वराह का सिर लगा दिया. इस घटने के बाद से वहां मणिभद्र की पूजा होने लगी.

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने माणिक शाह को यह वरदान दिया था कि यहां आने वाले हर इंसान की दरिद्रता दूर हो जाएगी. पुजारी बताते हैं कि अगर आपको पैसे की जरूरत है तो आप यहां गुरुवार को आकर पूजा करने पर अगले गुरुवार तक आपको पैसे मिल जाते हैं.

इस गांव के बारे में ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश के कहने पर वेद व्यास ने यहीं पर महाभारत की रचना की थी. इसके साथ ही महाभारत की लड़ाई समाप्त होने के बाद पांडव और द्रौपदी के साथ स्वर्गारोहण के लिए इसी गांव से होकर गए थे.

माना जाता है कि पांडव यहीं से होकर स्वर्गारोहिणी सीढ़ी तक गए थे. भगवान में विश्वास रखने वाले लोग अक्सर इस गांव में आकर पूजा अर्चना करते हैं और भगवान से अपनी गरीबी दूर करने की कामना करते हैं. इस गांव में कोई भी व्यक्ति आकर पूजा-अर्चना कर सकता है और अपनी गरीबी दूर करने की कामना कर सकता है.

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First published: 20 November 2018, 13:11 IST
 
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