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रातोंरात गायब हो गया था ये गांव, वजह जानकर दंग रह जाएंगे आप

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 January 2019, 0:15 IST

प्राचीन काल में हमारे देश में तमाम सभ्यताएं ने जन्म लिया. ये सभ्यताएं समय के साथ-साथ बदल गईं या जमीन में समा गई. जिनके रहस्य आज भी भारत की धरती में छिपे हुए हैं. लेकिन कई सदियां बीत जाने के बाद भी इन सभ्यताओं का आज कोई पता नहीं चल सका. इनके रहस्य आज भी अनसुलझे हैं. ये रहस्य ऐसे हैं कि इन्हें जितना सुलझाने की कोशिश करोगे वो उतने ही उलझते जाएंगे.

राजस्थान के जैसलमेर में एक ऐसा ही गांव है जिसकी जमीन में कई रहस्य छिपे हुए हैं. इस गांव नाम है कुलधरा. कुलधारा गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा है. एक ऐसा गांव जो रात ही रात में वीरान हो गया और सदियों से लोग आजतक नहीं समझ पाए कि आखिर ये गांव वीरान कैसे हो गया.

इस गांव के वीरान होने का रहस्य अजीबोगरीब है. दरअसल, करीब 200 साल पहले कुलधरा आबाद हुआ करता था. कुलधरा गांव के आसपास 84 गांवों में पालीवाल ब्राह्मण रहा करते थे. लेकिन एक बार कुलधरा को किसी की बुरी नजर लग गई. इसकी वजह एक शख्स बना. जो रियासत का दीवान था जिसका नाम सालम सिंह था. सालिम सिंह अय्याश किस्म का था.

एक बार उसकी नजर गांव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गई. दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था. उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया. हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा.

दीवान सिंह और गांववालों की ये लड़ाई अब एक कुंवारी लड़की के सम्मान की भी थी. गांव के आत्मसम्मान की भी. गांव की चौपाल पर पालीवाल ब्राह्मणों की बैठक हुई और 5,000 से ज्यादा परिवारों ने अपने सम्मान के लिए रियासत छोड़ने का फैसला ले लिया. कहा जाता है कि निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए. पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे.

अगली शाम कुलधरा कुछ यूं वीरान हुआ, कि आज परिंदे भी उस गांव की सरहदों में दाखिल नहीं होते. कहते हैं गांव छोड़ते वक्त उन ब्राह्मणों ने इस जगह को श्राप दिया था. बता दें कि बदलते वक्त के साथ 82 गांव तो दोबारा बन गए, लेकिन दो गांव कुलधरा और खाभा आजतक आबाद नहीं हो पाए. ये गांव अब भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में हैं जिसे दिन की रोशनी में सैलानियों के लिए रोज खोल दिया जाता है.

कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में है. अब ये गांव पूरी तरह से टूरिस्ट प्लेस बन चुका है. कुलधरा गांव घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है. बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने और उनकी चूड़ियों और पायलों की आवाज हमेशा ही आती रहती है.

इस गांव में एक मंदिर है जो आज भी श्राप से मुक्त है. एक बावड़ी भी है जो उस दौर में पीने के पानी का जरिया था. एक खामोश गलियारे में उतरती कुछ सीढ़ियां भी हैं, कहते हैं शाम ढलने के बाद अक्सर यहां कुछ आवाजें सुनाई देती हैं. लोग मानते हैं कि वो आवाज 18वीं सदी का वो दर्द है, जिनसे पालीवाल ब्राह्मण गुजरे थे. गांव के कुछ मकान हैं, जहां रहस्यमय परछाई अक्सर नजरों के सामने आ जाती है.

First published: 1 January 2019, 23:52 IST
 
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