Home » अजब गजब » Meet This Lucknow Guy Anand Mishra Who Know as a Chota Masterji in 13 Years Age in 125 Village
 

125 गांव के गरीब बच्चों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं ये 13 साल के 'छोटे मास्टरजी'

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 July 2018, 13:13 IST

जिस उम्र में बच्चे पूरा-पूरा दिन खेलने में बिता देते हैं. उस उम्र में कोई बच्चा अगर सैकड़ों बच्चों में पढ़ाई का अलख जगाने की कोशिश कर रहा हो तो उसे आप क्या करेंगे.यकीनन आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे, लेकिन लखनऊ के आनंद कृष्ण मिश्र कुछ ऐसा ही कर रहे हैं. आनंद की उम्र महज 13 साल है और अभी वो सिर्फ 12वीं क्लास में पढ़ते हैं.लेकिन आनंद इतनी कम उम्र में उन तमाम बच्चों को पढ़ाई की रोशनी दे रहे हैं. जिनके पास पढ़ने के लिए पैसे तक नहीं है.

आनंद पढ़ाई में हमेशा अव्वल आते हैं. साल 2013 में लखनऊ महोत्सव में आनंद ने 'शहजादे अवध'का खिताब अपने नाम किया था. आनंद स्पोर्ट्स में भी धुरंधर हैं. वो 9 साल की उम्र से ही गांव में रहने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. वह गांव-गांव जाकर 'बाल चौपाल' लगाते हैं और स्कूल न जाने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं. आनंद का मकसद ऐसे बच्चों को आत्म-निर्भर बनाना है जिनके मा-बाप के पास पढ़ाई के लिए पैसे नहीं है.

यही नहीं आनंद बच्चों को साइबर वर्ल्ड की भी जानकारी देते हैं जिसमें वह इंटरनेट का पढ़ाई में महत्व बताते हैं. बाल चौपाल की शुरुआत उन्होंने लखनऊ से 12 किलोमीटर दूर काकोरी के भवानी खेड़ा गांव से की थी. इसके बाद और भी गांव में चौपाल लगाकर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. आनंद सिर्फ 5 घंटे सोते हैं और उसका ज्यादा समय पढ़ने और पढ़ाने में ही बीतता है.

आनंद का कहना है कि, कुछ वर्ष पहले उन्होंने एक बच्चे को मोमबत्ती की रोशनी में पढाई करते देखा, जो संस्कृत और मराठी दोनों जानता था. आनंद के परिवार ने उस बच्चे की मदद करने की पेशकश की, लेकिन बच्चे ने सिर्फ अपनी किताबों के लिए ही पैसे लिए.

इस बात ने आनंद को इतना झकझोर दिया कि उन्होंने बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देने का मन बना लिया. आनंद ने सोचा कि ऐसे कितने की प्रतिभावान बच्चे होंगे जिनके पास अवसर का अभाव होगा. आनंद ने अपने पिता से सलाह की और चौपाल लगानी शुरु कर दी.

बता दें कि अक्सर घर वाले लड़कियों को दूर दराज के स्कूल में नहीं भेजते, इसलिए आनंद उनके लिए एक स्कूल खोलना चाहते हैं, पढ़ाई पूरा करने के बाद आनंद एक आईएएस अफसर बनना चाहते हैं. बता दें कि आनंद हर रोज 100 से अधिक बच्चों को पढ़ाते हैं और उनकी हर हाल में मदद करने कि लिए उनके मा-बात उनकी मदद करते हैं. आनंद के माता-पिता यूपी पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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First published: 22 July 2018, 13:09 IST
 
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