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इस देश में एक घंटे के अंदर तीन लोगों ने ली थी राष्ट्रपति पद की शपथ, बेहद दिलचस्प है कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 July 2020, 17:27 IST

इतिहास में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनके बारे में जानकार लोगों को काफी हैरानी होती है. 106 साल पहले यानि 1913 को फरवरी महीने में उत्तरी अमेरिका में बसे मेक्सिको में ऐसी ही एक घटना हुई थी जिसके जानकर आपको आश्चर्य होगा. दरअसल, इस देश में एक घंटे के अंदर तीन राष्ट्रपति बन गए थे. मेक्सिको क्षेत्रफल के हिसाब से अमेरिका में पांचवां और दुनिया का 14वां सबसे बड़ा देश है. इतना ही नहीं यह दुनिया के सबसे खूबसूरत देशों में से एक भी है. लेकिन 19 फरवरी 1913 को कुछ ऐसा हुआ जो इतिहास में दर्ज हो गया.

हुआ क्या था


9 फरवरी 1913 को मैक्सिको में विद्रोह की शुरूआत हुई थी. इतिहास में इसे "डेसेना ट्रागिका," या टेन ट्रेजिक डेज़ कहा जाता है. राष्ट्रपति फ्रांसिस्को आई मैडेरो के वफादार संघीय बलों और विद्रोहियों के बीच नेशनल पैलेस और सैन्य चौकी शहर के बीच गोलीबारी हुई थी. इस दौरान राष्ट्रपति फ्रांसिस्को आई मैडेरो के खिलाफ पूरे देश में जबरदस्त विद्रोह हो रहा था और देश के हर शहरों में इस विद्रोह की आग भड़क रही थी. जल्द ही यह विद्रोह राजधानी तक पहुंच गया.

 

Pedro Lascuráin

जनरल विक्टोरियानो हुएर्टा के नेतृत्व में यह विद्रोह हो रहा था और विद्रोही गुटों ने राष्ट्रपति फ्रांसिस्को आई मैडेरो की सरकार का तख्तापलट कर दिया था. राष्ट्रपति मैडेरो को हिसारत में ले लिया गया, इस दौरान पेड्रो लस्कुरिन ने मैडेरो को भरोसा दिलाया कि अगर वो राष्ट्रपति पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनकी जान को खतरा है. इसके बाद राष्ट्रपति मैडेरो ने इस्तीफा दिया और कानूनी रूप से इसे मान लिया गया.

पेड्रो लस्कुरिन ने ली राष्ट्रपति पद की शपथ

मैक्सिको के 1857 के संविधान के तहत, देश के राष्ट्रपित के पद से हटाए जाने के बाद उपराष्ट्रपति, अटॉर्नी जनरल, विदेश मंत्री और फिर आंतरिक मंत्री क्रम:अनुसार राष्ट्रपति के दावेदार थे. जनरल हुएर्टा ने राष्ट्रपति के साथ-साथ उपराष्ट्रपति और अटॉर्नी जनरल को भी हटा दिया था. यानि इसके बाद विदेश मंत्री का राष्ट्रपति बनना तय था.

 

पेड्रो लस्कुरिन, राष्ट्रपति मैडेरो की सरकार में विदेश मंत्री थे. ऐसे में वो राष्ट्रपति बने. लेकिन यह सब तय प्लान के अनुसार हो रहा था. पेड्रो लस्कुरिन को जनरल हुएर्टा का समर्थन प्राप्त था. ऐसे में उन्होंने राष्ट्रपति बनते ही जनरल हुएर्टा को अपना आंतरिक मंत्री बनाया और फिर इस्तीफा दे दिया. इसके बाद नियमों के अनुसार, जनरल हुएर्टा का राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हुआ और बाद में उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली.

यह सब एक घंटे के अंदर हुआ था. पेड्रो लस्कुरिन करीब 26 मिनट के लिए राष्ट्रपित रहे, ऐसे में उनका नाम रिकॉर्ड में दर्ज हो गया. सबसे कम समय के राष्ट्रपति रहने का रिकॉर्ड आज भी पेड्रो लस्कुरिन के नाम ही है.

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First published: 16 July 2020, 16:59 IST
 
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