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असम में इस जगह सामूहिक आत्महत्या करने आते हैं पक्षी, हैरान करने वाला है सच

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 July 2018, 11:53 IST

स दुनिया की हर चीज को एक ना एक दिन जरूर खत्म होना है. इंसान हो या पक्षी. हर चीज, जीव-जंतु को इस दुनिया को अलविदा कहना है. विज्ञान ने भले ही आज इतनी तरक्की कर ली हो, लेकिन मौत के राज से कोई पर्दा नहीं उठा पाया. कई बार इंसान जिंदगी में मिलने वाली परेशानियों से इतना तंग हो जाता है कि खुदकुशी कर लेता हैं.

ऐसा नहीं कि इंसान ही खुदकुशी करते हैं, बल्कि ये प्रवृत्ति पक्षियों में भी पाई जाती है. इसीलिए जटिंगा वैली में सैकड़ों पक्षी सामूहिक आत्महत्या करने के लिए पहुंचते हैं. ये बात आपको हैरान जरूर कर सकती है लेकिन ये बात बिल्कुल सच है और इस बात के प्रमाण भी हैं. यही नहीं जटिंगा वैली में ये सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है.

दरअसल, देश के पूर्वोत्तर राज्य असम में एक घाटी है जिसे जटिंगा या जतिंगा घाटी कहा जाता है.इस घाटी में आपको पक्ष‌ियों के आत्महत्या करने का नजारा देखने को मिलेगा. इस घाटी में मानसून के महीने में ऐसी घटनाएं अध‌िक होती हैं. इसके अलावा अमावस और कोहरे वाली रात को पक्ष‌ियों के आत्महत्या करने के मामले अध‌िक देखने को म‌िलेंगे.

पक्ष‌ियों के आत्महत्या का रहस्य क्या है इस बात को लेकर कई तरह की बातें इस इलाके में प्रचल‌ित हैं. यहां की जनजात‌ि यह मानती है क‌ि यह भूत-प्रेतों और अदृश्य ताकतों का काम है.

जबक‌ि वैज्ञान‌िक धारणा यह है क‌ि यहां तेज हवाओं से पक्ष‌ियों का संतुलन ब‌िगड़ जाता है और वह आस-पास मौजूद पेडों से टकराकर घायल हो जाती हैं और उनकी मौत हो जाती है. अब बात चाहे जो भी हो लेक‌िन यह स्‍थान पक्ष‌ियों के आत्महत्या के कारण दुन‌िया भर में रहस्य बना हुआ है.

बता दें कि असम के उत्तरी कछार पहाड़ी का ये इलाका विविध जनजातीय संस्कृति का एक ऐसा कोलाज प्रस्तुत करता है, जो पूर्वोत्तर के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलेगा. सिर्फ दिमा हासो जिले में ही लगभग दो दर्जन जनजातीय समुदाय के लोग रहते हैं. जतिंगा की रहस्यमय घटना का पता भी मणिपुर की ओर से आई जेमेस नामक जनजातीय समूह के लोगों ने लगाया था. इस जनजाति के लोग सुपाड़ी की खेती की तलाश में यहां पहुंचे थे.

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First published: 17 July 2018, 11:53 IST
 
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