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देश की इस नदी में पानी के साथ बहता है सोना, कोई नहीं जान पाया इसका रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 December 2019, 19:11 IST

Swarnarekha River : दुनियाभर में नदियों (Rivers) की कमी नहीं है. भारत में भी सैकड़ों नदियां हैं. इन सब की अलग-अलग कहानियां और महत्व भी हैं. गंगा नदी (Ganga) और यमुना (Yamuna) नदी को तो सबसे पवित्र माना जाता है. ऐसे ही देश में एक नदी ऐसी भी है. जिसमें पानी के साथ सोना (Gold) भी बहता है. यही नहीं इस नदी में से लोग सोना इकट्ठा करते हैं और यही उनके लिए रोजगार भी बन गया है.

दरअसल, झारखंड (Jharkhand) में बहने वाली स्वर्णरेखा नदी (Swarnrekha River) को सोने की नदी भी कहा जाता है. इस नदी की रेत से लोग सैकड़ों साल से सोना निकाल रहे हैं. हालांकि, आजतक रेत में सोने के कण मिलने की सही वजह का कोई पता नहीं चल पाया है. भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि नदी तमाम चट्टानों से होकर गुजरती है. इसी दौरान घर्षण की वजह से सोने के कण इसमें घुल जाते हैं. हालांकि ये जानकारी भी पूरी तरह से सही नहीं मानी गई है. ये नदी झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के कुछ इलाकों से होकर बहती है.

इस नदी को कुछ इलाकों में सुबर्ण रेखा के नाम से भी जाना जाता है. इस नदी का उद्गम रांची से करीब 16 किमी दूर से होता है. इस नदी की कुल लंबाई 474 किलोमीटर है. स्वर्ण रेखा और उसकी एक सहायक नदी भी है जिसका नाम है ‘करकरी’. इस नदी की रेत में भी सोने के कण पाए जाते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि स्वर्ण रेखा में सोने का कण, करकरी नदी से ही बहकर पहुंचता है.

करकरी नदी की लंबाई केवल 37 किलोमीटर है. इन दोनों नदियों में सोने के कण आने का रहस्य आजतक रहस्य ही बना हुआ है. झारखंड में तमाड़ और सारंडा जैसी जगहों पर नदी के पानी में स्थानीय आदिवासी, रेत को छानकर सोने के कण इकट्ठा करने का काम करते हैं. इस काम में कई परिवारों की पीढ़ियां लगी हुई हैं. जिनमें महिला और पुरुषों के अलावा बच्चे भी शामिल होते हैं.

घर का हर सदस्य इस नदी की रेत को रोजाना इकट्ठा करता है जैसे उनके लिए ये रुटीन काम की तरह ही हो. यहां के आदिवासी परिवारों के कई सदस्य, पानी में रेत छानकर दिनभर सोने के कण निकालने का काम करते हैं. आमतौर पर एक व्यक्ति, दिनभर काम करने के बाद सोने के एक या दो कण निकाल लेता है. नदी से सोना छानने के लिए बेहद धैर्य और मेहनत की जरूरत होती है. एक व्यक्ति एक महीने में 60-80 सोने के कण निकाल पाता है.

वहीं कभी-कभी एक महीने में इनकी संख्या 30 से कम रह जाती है. ये कण चावल के दाने या उससे थोड़े बड़े होते हैं. रेत से सोने के कण छानने का काम सालभर होता है. लेकिन बाढ़ के दौरान दो महीने के लिए काम बंद करना पड़ता है. रेत सोना निकालने वालों को एक कण के बदले 80 से 100 रुपये मिलते हैं. एक आदमी सोने के कण बेचकर एक महीने में 5 से 8 हजार रुपये कमा लेता है. हालांकि बाजार में इस एक कण की कीमत करीब 300 रुपये या उससे ज्यादा होती है.

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First published: 19 December 2019, 19:11 IST
 
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