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इस किले को माना जाता है भारत का सबसे पुराना किला, आज भी बना हुआ है इसका रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 June 2020, 16:11 IST

Mystery of India's Oldest ford of Kangra: हमारे देश में अंग्रेजों (British) से पहले मुग़ल (Mughal) और राजपूत राजा (Rajput King) राज किया करते थे. देशभर के अलग-अलग इलाकों में कई राजा राज्य किया करते थे. ज्यादातर राजाओं (Kings) को बड़े-बड़े महल और किले (Fort) बनवाने का शौक था. हर राजा ने ऐसे अद्भुत और मजबूत किले बनवाए जिनमें से बहुत से आज भी सुरक्षित हैं. ऐसा ही एक किला है हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कांगड़ा जिले (Kangra District) में जिसे कांगड़ा किला (Kangra Fort) के नाम से ही जाना जाता है. हर किला की तरह कांगड़ा किला भी रहस्यमयी (Mystrey) है. लेकिन इस किले का आजतक कोई रहस्य नहीं जान पाया.

463 एकड़ में फैला यह किला हिमाचल में मौजूद किलो में सबसे विशाल है. यह किला किसी रहस्य से कम नहीं है, क्योंकि कि इसे किले को कब बनवाया गया इसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है. बता दें कि इस किले का उल्लेख सिकंदर महान के युद्ध संबंधी रिकार्डों में भी मिलता है, जिससे इसके ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में मौजूद होना सिद्ध होता है. ऐसा माना जाता है कि इसका किला का निर्माण कांगड़ा राज्य (कटोच वंश) के राजपूत परिवार ने करवाया होगा. जिन्होंने खुद को प्राचीन त्रिगत साम्राज्य के वंशज होने का प्रमाण दिया था. त्रिगत साम्राज्य का उल्लेख महाभारत में मिलता है.


यही नहीं कांगड़ा किले का इतिहास भी काफी रोचक है. बताया जाता है कि साल 1615 ईस्वी में मुगल सम्राट अकबर ने इस किले को जीतने के लिए घेराबंदी की थी, लेकिन वो इसमें असफल रहा था. इसके बाद 1620 ईस्वी में अकबर के बेटे जहांगीर ने चंबा के राजा जो इस क्षेत्र के सभी राजाओं में सबसे बड़े थे को मजबूर करके इस किले पर कब्जा कर लिया. मुगल सम्राट जहांगीर ने सूरज मल की सहायता से अपने सैनिकों को इस किले में प्रवेश करवाया था. उसके बाद 1789 ईस्वी में यह किला एक बार फिर कटोच वंश के अधिकार में आ गया.

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राजा संसार चंद द्वितीय ने इस प्राचीन किले को मुगलों से जीत लिया. इसके बाद 1828 ईस्वी तक यह किला कटोचो के अधीन ही रहा, लेकिन राजा संसार चंद द्वितीय की मृत्यु के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने इस किले पर कब्जा कर लिया. उसके बाद 1846 तक यह सिखों की देखरेख में रहा. उसके बाद अंग्रेजों ने इस किले पर डेरा जमा लिया. उसके बाद चार अप्रैल 1905 को आए एक भीषण भूकंप के बाद अंग्रजों ने इस किले को छोड़ दिया, लेकिन इस भूकंप में इस किले को भारी क्षति हुई.

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इसके कारण कई बहुमूल्य कलाकृतियां, इमारतें नष्ट हो गईं, लेकिन फिर भी यह किला अपने आप में इतिहास की कई कहानियां समेटे हुए है. बता दें कि इस किले में आज भी सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और भारत की प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला के बारे में जानने की कोशिश करते हैं.

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First published: 29 June 2020, 16:11 IST
 
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