Home » अजब गजब » New Zealand Company Finds Good Experiment in Four Day Working Week
 

इस कंपनी में जॉब करने वालों की है बल्ले-बल्ले, हफ्ते में सिर्फ 4 दिन करते हैं काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 August 2018, 11:44 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की अक्सर शिकायत रहती है कि उन्हें एक ही वीक ऑफ मिलता है. यानी उन्हें हफ्ते में 6 दिन काम करना पड़ता है और एक दिन की छुट्टी मिलती है. हालांकि भारत में कुछ कंपनियों में अब दो वीक ऑफ यानी हफ्ते में 2 दिन की छुट्टी का चलन शुरु हो गया है. लेकिन न्यूजीलैंड की एक कंपनी दुनियाभर की कंपनियों से कहीं आगे निकल गई. क्योंकि ये कंपनी अपने कर्मचारियों को एक हफ्ते में 3 छुट्टियां यानी तीन वीक ऑफ देती है.

अगर आप सोच रहे हैं कि हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी देने पर कंपनी कर्मचारियों के पैसे काटती होगी, लेकिन ऐसा नहीं है. हर कर्मचारी को इन छुट्टी वाले दिनों की भी सैलरी दी जाती है. दरअसल, न्यूजीलैंड की एक कंपनी ने हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम कराने का प्रयोग किया जो सफल रहा.

कंपनी अब इसे हमेशा के लिए इसे लागू करने जा रही है. बता दें कि परपिचुअल गार्डियन नाम की इस कंपनी ने अभी हाल में दो महीने का रिजल्ट जारी किया. कंपनी ने बताया कि चार दिन काम कराने से शानदार नतीजे मिले. इससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ गई.

वहीं कर्मचारियों का कहना है कि वो तीन वीक ऑफ की वजह से प्रोफेशन और जिंदगी के बीच सही तालमेल बिठा पाए है. इतना ही नहीं हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम कराने से कर्मचारियों के तनाव को कम करने में भी मदद मिली. शानदार नतीजे को देखते हुए कंपनी अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन काम करने को नियमित करने पर विचार किया जा रहा है.

बता दें कि 240 लोगों की इस कंपनी ने चार दिन काम के बदले 5 दिन की सैलरी दी. कंपनी के सीईओ एंड्रयू बर्नी ने सीएनएन को बताया कि, "बस यह एक प्रयोग था जो मैं करना चाहता था ताकि अपनी टीम को एक बेहतर माहौल दे सकूं. मुझे खुशी है कि मेरी टीम ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी और मेरा सपना साकार किया.”

गौरतलब है कि, पिछले साल एक सर्वे में 54 फीसदी कर्मचारियों ने माना था कि वे नौकरी और जिंदगी के बीच सही तालमेल बिठा पाते हैं, जबकि दो महीने के इस ट्रायल के बाद 78 प्रतिशत इंप्लॉई काम को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नजर आए. यही नहीं काम का तनाव भी 7 प्रतिशत कम आंका गया, जबकि काम के प्रति कर्मचारियों की दिलचस्पी 20 फीसदी तक बढ़ गई.

ये भी पढ़ें- जज्बे को सलाम: 96 साल की उम्र में लिटरेसी टेस्ट देने एग्जाम सेंटर पहुंची 'अम्मा'

First published: 8 August 2018, 11:44 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी