Home » अजब गजब » Oldest Clove tree of the world in Ternate Island Indonesia
 

इस द्वीप पर स्थित है तीन हजार साल पुराना लौंग का पेड़, देखने के लिए रोजाना आते हैं हजारों लोग

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 February 2019, 14:10 IST

लौंग का इस्तेमाल हर घर की रसोई में किया जाता है. लौंग खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभदायक है. लौंग का प्रयोग दांतों के दर्द, गले की खराश के अलावा पेट दर्द में भी प्रयोग किया जाता है. यही वजह है कि लौंग का प्रयोग हर घर में किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि लौंग का चलन दुनिया में कब से शुरु हुआ. आज हम आपको लौंग के इतिहास से जुड़े ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनके बारे में आपने आजतक नहीं सुना होगा.

बताया जाता है कि लौंग का इतिहास अब से करीब तीन हजार साल पुराना है. तब पूर्वी एशिया के कुछ द्वीपों पर केवल लौंग के ही पेड़ हुआ करते थे. ऐसा माना जाता है कि उनदिनों टर्नेट, टिडोर और उसके कुछ द्वीपों में लौंग के पेड़ पाए जाते थे.


इसीलिए यहां रहने वाले लोगों को लौंग का खूब फायदा मिला. ये लोग लौंग का कारोबार करते थे और इससे खूब पैसा कमाते थे. ऐसा माना जाता है कि दुनिया का सबसे पुराना लौंग का पेड़ इंडोनेशिया के टर्नेट द्वीप पर है. बता दें कि टर्नेट एक ऐसा द्वीप है जहां ज्वालामुखियों की भरमार हैं. बावजूद इसके लोग खुद को यहां जाने से रोक नहीं पाते.

इस द्वीप की खूबसूरती बाकी द्वीपों के हटकर है. इस द्वीप पर तमाम तरह के जीव-जंतु पाए जाते हैं. इस द्वीप पर उड़ने वाले मेंढक भी पाए जाते हैं. जो आपके मन को मोह लेंगे. ऐसा माना जाता है कि इसी वजह से अंग्रेज वैज्ञानिक अल्फ्रेड रसेल वॉलेस ने उन्नीसवीं सदी में नई नस्लों की खोज के लिए इस द्वीप की यात्रा की.

अपने इस काम को अंजाम देने के लिए उन्होंने इन द्वीपों पर कई साल भी बिताए. वहां से जब वह वापस लंदन गए तो उनके पास करीब सवा लाख से भी ज्यादा प्रजातियों के नमूने थे.

 बताया जाता है कि लौंग के व्यवसाय से जब टर्नेट और टिडोर के सुल्तानों के पास काफी पैसा इकट्ठा हो गया था. उसके बाद वो खुद को सबसे ज्यादा ताकतवर समझने लगे. इसीलिए उनमें आपस में लड़ाई झगड़े होने लगे. उनकी इस लड़ाई का फायदा अंग्रेजों और डच कारोबारियों उठाया और उनके इस इलाकों पर कब्जा लिया.

मालिक की जान बचाने को लुटेरों से भिड़ गया बहादुर कुत्ता, लहूलुहान होने के बाद भी किया डटकर मुकाबला

First published: 23 February 2019, 14:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी