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भारत के इस स्थान से दिखाई देता है श्रीलंका, यहां रात में जाने वाला कभी नहीं आता जिंदा वापस

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 September 2019, 14:12 IST

विविधताओं वाले हमारे देश में तमाम ऐसी जगहें मौजूद हैं जिनके बारे में हम बहुत कम जानते हैं. इन्हीं में से एक जगह है धनुषकोडी. ये जगह दक्षिण के भारत के राज्य तमिलनाडु के पूर्वी तट पर रामेश्वरम द्वीप के किनारे पर है. जिसे भारत का अंतिम छोर भी कहा जाता है. ये जगह बिल्कुल वीरान है. जहां से श्रीलंका दिखाई देता है. हालांकि ये जगह हमेशा से वीरान नहीं थी, एक समय में ये लोगों से आबाद थी. लेकिन अब ये जगह पूरी तरह से वीरान हो गई है.

बता दें कि धनुषकोडी भारत और श्रीलंका के बीच स्थित है. जो दोनों देशों के बीच एकमात्र ऐसी स्थलीय सीमा है जो पाक जलसंधि में बालू के टीले पर स्थित है जो केवल 50 गज की लंबाई में है. यही नहीं इसी के चलते इस जगह को विश्व के लघुतम स्थानों में से एक माना जाता है.

वैसे तो इस जगह पर दिन के समय भारी संख्या में लोग घूमने आते हैं, लेकिन रात होने से पहले ही यहां से लोगों को वापस कर दिया जाता है क्योंकि अंधेरा होने के बाद यहां घूमना मना है. लोग शाम होने से पहले ही यहां से रामेश्वरम लौट जाते हैं. बता दें कि धनुषकोडी से रामेश्वरम तक का रास्ता 15 किलोमीटर लंबा है और यह भी सुनसान है. जहां किसी को भी डर लग सकता है. क्योंकि इस इलाके को रहस्यमयी माना जाता है. कई लोग इस जगह को भूतहा भी मानते हैं.

बता दें कि साल 1964 में आए भयानक चक्रवात से पहले धनुषकोडी भारत का एक उभरता हुआ पर्यटन और तीर्थ स्थल था. तब यहां यानी धनुषकोटि में रेलवे स्टेशन, अस्पताल, चर्च, होटल और पोस्ट ऑफिस की कमी नहीं थी, 1964 में आए भयंकर चक्रवात में सबकुछ खत्म हो गया. कहते हैं कि तब 100 से अधिक यात्रियों वाली एक रेलगाड़ी समुद्र में डूब गई थी. उसके बाद से यह जगह बिल्कुल सुनसान हो गई.

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ऐसा माना जाता है कि धनुषकोडी ही वो जगह है, जहां से समुद्र के ऊपर रामसेतु का निर्माण शुरु किया गया था. कहते हैं कि इसी जगह पर भगवान राम ने हनुमान को एक पुल का निर्माण करने का आदेश दिया था, जिसपर से होकर वानर सेना लंका जा सके, जहां रावण ने माता सीता को हरण करके रखा था. इस जगह पर भगवान राम से जुड़े कई मंदिर आज भी मौजूद है.

कहा जाता है कि रावण के भाई विभीषण के अनुरोध पर भगवान राम ने अपने धनुष के एक सिरे से सेतु को तोड़ दिया था, इसीलिए इसका नाम धनुषकोटि पड़ गया. तमिल में कोटि का मतलब सिरा होता है इसलिए इसे धनुषकोडी नाम दिया गया है.

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First published: 11 September 2019, 14:12 IST
 
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