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पाकिस्तान को वो राष्ट्रपति जो बाद में बना प्रधानमंत्री, रात में दो बजे लटकाया गया फांसी पर

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2020, 16:22 IST

किसी भी देश का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री उस देश के बाकी के सरकारी अधिकारियों में सबसे ऊपर होता है. ऐसा काफी कम ही होता है जब एक लोकतांत्रिक सरकार में किसी देश के प्रधानमंत्री को फांसी जैसी कठोर सजा दी जाए. बात अगर भारत की करें तो हमारे देश में आज तक किसी भी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति को फांसी की सजा नहीं हुई है. लेकिन हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में ऐसा हुआ है. आपको जानकर हैरानी होगी कि पाकिस्तान में जिस प्रधानमंत्री को फांसी की सजा हुई, उससे पहले वो व्यक्ति पाकिस्तान का राष्ट्रपति भी रह चुका था.

जुल्फिकार अली भुट्टो (Zulfikar Ali Bhutto) की जो 20 दिसंबर 1971 से 13 अगस्त 1973 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे और फिर 14 अगस्त 1973 से पांच जुलाई 1977 तक वो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (Former Prime Minister of Pakistan) भी रहे. उन्हें रात के दो बजे फांसी की सजा हुई थी.


जुल्फिकार अली भुट्टो को एक समय पर पाकिस्तान का सबस ताकतवर नेता माना जाता था लेकिन साल 1977 में अचानक से सब कुछ बदल गया. साल 1977 में पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक की अगुवाई में सेना ने जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट कर दिया. सरकार का तख्तापलट करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को विरोधी दल के नेता की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि भुट्टो हमेशा से इस बात से इंकार करते रहे कि उन्होंने वो हत्या की है.

18 मार्च को 1978 को जुल्फिकार अली भुट्टो को लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी. इस दौरान वो रावलपिंडी जेल में थे. उन्होंने लाहौर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में अपील की लेकिन अदालत ने उनकी अपील ठुकरा दी.

3 अप्रैल 1979 को रात के दो बजकर चार मिनट पर जुल्फिकार अली भुट्टो को रावलपिंडी जेल में ही फांसी पर लटका दिया गया. पाकिस्तान में आम तौर पर रात को फांसी नहीं दी जाती है. वहां पर सुबह के समय फांसी की सजा देने का प्रावधान है, लेकिन उनके मामले में यह नियम नहीं माना गया.

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जिस रात जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी की सजा मिली थी, उस रात को वो सो रहे थे जेल के अधिकारी लगातार उन्हें जगाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन भुट्टो बार बार सोए जा रहे थे. इसके बाद जब जेल के अधिकारियों ने उनसे कहा कि सभी उन्हें ही देख रहे हैं तो वो जाए गए, इस दौरान वो फांसी के तख्त पर पहुंच चुके थे.

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First published: 19 February 2020, 11:13 IST
 
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