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800 साल पुराना है भारत का ये किला, जिसे माना जाता है सांपों का निवास

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 July 2020, 15:58 IST

Panhala Fort Kolhapur: हमारे देश में आज भी सैकड़ों किले (Fort) और हवेलियां (Mansion) मौजूद हैं. इन किलों में से ज्यादातर में कोई नहीं रहता. हालांकि भारत सरकार (Government of India) का इनपर कब्जा है और भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) इन किलों की देखभाल करता है. वहीं कुछ किले ऐसे भी हैं जिनकी कोई देखभाल नहीं करता है और ये किले आज भी मौजूद है. इन किलों को या तो भूतहा माना जाता है कि फिर सांपों और बिच्छुओं का निवास स्थान. ऐसा ही एक किला है महाराष्ट्र (Maharashtra) के कोल्हापुर (Kolhapur) में, जिसे सांपों का घर (Snake House) कहा जाता है.

कोल्हापुर जिला मुख्यालय (Kolhapur District Administration) से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित पन्हाल दुर्ग (Panhala Durg) का निर्माण 1178 से 1209 ई. के दौरान किया गया था. जिसका निर्माण शिलाहार शासक भोज द्वितीय ने कराया था. कहा जाता है कि 'कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली' वाली कहावत इसी किले से जुड़ी हुई है. इस किले को नाम है पन्हाला दुर्ग के अलावा पन्हालगढ़, पनाला और पहाला आदि नामों से भी जाना जाता है. बता दें कि पन्हाला वैसे तो एक छोटा सा शहर और हिल स्टेशन है, लेकिन इसका इतिहास शिवाजी महाराज से जुड़ा हुआ है. 


वैसे तो यह किला यादवों, बहमनी और आदिल शाही जैसे कई राजवंशों के अधीन रह चुका है, लेकिन साल 1673 ईस्वी में इसपर शिवाजी महाराज का अधिकार हो गया. कहा जाता है कि शिवाजी महाराज पन्हाला किले में सबसे अधिक समय तक रहे थे. उन्होंने यहां 500 से भी ज्यादा दिन बिताए थे. बाद में यह किला अंग्रेजों के अधीन हो गया.

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बता दें कि पन्हाला दुर्ग को 'सांपों का किला' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी बनावट टेढ़ी-मेढ़ी है यानी यह देखने में ऐसी लगती है जैसे कोई सांप चल रहा हो. इसी किले के पास जूना राजबाड़ा में कुलदेवी तुलजा भवानी का मंदिर भी स्थित है, जिसमें एक गुप्त सुरंग बनी है, जो सीधे 22 किलोमीटर दूर पन्हाला किले में जाकर खुलती है.

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फिलहाल इस सुरंग को बंद कर दिया गया है. इसी किले में तीन मंजिला इमारत के नीचे एक गुप्त रूप से बनाया गया कुआं है, जिसे अंधार बावड़ी के नाम से जाना जाता है. कहा जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण मुगल शासक आदिल शाह ने करवाया था.

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इसके निर्माण की वजह ये थी कि आदिल शाह का मानना था कि जब भी दुश्मन किले पर हमला करेंगे तो वो आसपास के कुओं या तालाबों में मौजूद पानी में जहर मिला सकते हैं.

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First published: 8 July 2020, 15:58 IST
 
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