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द्वितीय विश्व युद्ध के सबसे खतरनाक बम को नदी के अंदर किया गया डिफ्यूड, वीडियो में देखें फिर हुआ क्या?

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 October 2020, 11:29 IST

World War II Bomb: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हर देश ने आधुनिक तकनीकी से सैल उपकरणों का इस्तेमाल किया था. जिसमें बड़ी संख्या में घाटक बम भी शामिल थे. ये बम आज भी दुनिया के कई देशों में जमीन के अंदर दबे मिल जाते हैं. जो आप भी तबाही मचाने के लिए काफी है. हाल ही में बाल्टिक सागर में पांच टन के एक बम को डिफ्यूज किया गया. इस विशाल बम के नदी के अंदर विस्फोट कर उड़ा दिया गया. बता दें कि इस बम का निकनेम टॉलबॉय (Tallboy Bomb) है. जिसे "भूकंप बम" (Earthquake Bomb) के रूप में भी जाना जाता है.

साल 1945 में नाजी युद्धपोत पर हुए हमले में रॉयल एयर फोर्स द्वारा इसे गिरा दिया गया था. पिछले साल इसकी खोज 12 मीटर यानी 39 फीट की गहराई पर की गई थी. उत्तर-पश्चिमी पोलैंड के बंदरगाह शहर स्वाइनजस्की के करीब से ढूंढा गया था. यह बम छह मीटर से अधिक लंबा और 2.4 टन विस्फोटक से भरा हुआ था. जिसका वजन करीब 3.6 टन टीएनटी के बराबर था. नौसेना ने पहले कहा था कि उसने लगभग 500 मीटर दूर स्थित एक पुल को नष्ट होने के डर से एक नियंत्रित विस्फोट के पारंपरिक विकल्प को खारिज कर दिया था. विस्फोट करने के बजाय, इसको डिफ्लेग्रेशन की तकनीक का इस्तेमाल करके नष्ट करने की प्लानिंग थी.


रिमोट कंट्रोल डिवाइस के जरिए इसको नष्ट करना था. स्वीनजस्की में पोलिश नौसेना की 8 वीं तटीय रक्षा फ़्लोटिला के प्रवक्ता ग्रेज़गोरज़ लेवांडोव्स्की ने कहा, 'डिफ्लेग्रेशन की तकनीक एक विस्फोट में बदल गई.' उन्होंने कहा, "इसमें सीधे तौर पर शामिल लोगों के लिए कोई जोखिम नहीं था." उन्होंने कहा कि बम को "बेअसर" माना जा सकता है. वहीं स्विंउज्स्की सिटी हॉल के प्रवक्ता ने एएफपी को बताया कि उन्होंने सैन्य गोताखोरों द्वारा ऑपरेशन के दौरान किसी के घायल होने की कोई रिपोर्ट नहीं सुनी है, न ही शहर के बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान हुआ है. विस्फोट से पहले गांव को खाली करा दिया गया था.

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बता दें कि इस सप्ताह ऑपरेशन शुरू होने से पहले, लेवांडोव्स्की ने इसे "एक बहुत ही नाजुक काम" कहा था, जिसमें कहा गया था कि "सबसे तीखा कंपन बम विस्फोट कर सकता है. लगभग 750 स्थानीय निवासियों से पहले ही बम के चारों ओर 2.5 किलोमीटर (1.6 मील) के क्षेत्र से बाहर निकालने का आग्रह किया गया था. विस्फोट की जगह से कुछ ही दूरी पर एक गेम हॉल में लोगों को ठहराया गया था. सबसे बड़ा खतरा उनके लिए था. जो ऑपरेशन के दौरान वहां मौजूद थे. हलीना पासज़कोव्स्का ने कहा, 'मैं यहां 50 साल से रह रही हूं और अन्य बम भी हैं, लेकिन यह पहली बार है जब वहां निकासी हुई है. इससे पहले, हमें सिर्फ घर के अंदर रहने को कहा जाता था.'

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बता दें कि जब इस बम को विस्फोट कर उड़ाया गया तब आवाज के साथ पानी की धारा भी ऊपर तक गई. तब ऐसा प्रतीत हुआ जैसे मानों कोई फव्वारा चल रहा हो. ये एक शानदार नजारा था जिसकी एक वीडियो इनदिनों सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रही है.

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First published: 17 October 2020, 11:29 IST
 
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