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भारत में पहली बार जब महिलाओं को सुनाई गई फांसी की सजा, इनके अपराध की कहानी सुनकर कांप जाऐंगे आप

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 January 2020, 20:00 IST

पुणे की यरवदा जेल(Yerawada Central Jail) में रेणुका शिंदे(Renuka Shinde) और सीमा गावित(Seema Gavit) बीते 24 सालों से बंद है. ये दोनों महिलाएं सगी बहने हैं. इन दोनों महिलाओं पर 42 बच्चों की हत्या करने का आरोप है. दस्तवाजें को आधारा माने तो इस दोनों के साथ इनकी मां अंजना गावित भी दोषी पाई गई थी. एक बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो चुकी है. कहा जाता है कि इन तीनों मां-बेटियों ने साल 1990 से 1996 तक पुणे और उसके आस पास के शहरों से कुल 42 बच्चों का अपहरण किया और उनकी दर्दनाक हत्या कर दी. जब यह मामला उजागर हुआ तो महाराष्ट्र के अखबरों में इन खबरों ने सुर्खियां बटोरी. आजाद भारत में इस घटना से पहले ऐसा कोई वाक्या देखने को नहीं मिलता जब किसी गिरोह द्वारा इतने बड़े पैमाने पर बच्चों की हत्या की गई हो.

42 बच्चों के अपहरण और उनकी हत्याओं के मामले में राज्य सरकार ने सीआईडी का गठन किया. हालांकि जिस टीम ने जांच की वो इन तीनों महिलाओं को 13 अपहरण और 6 हत्याओं में आरोप सिद्ध कर पाने में सफल रही बाकियों के मामलों में जांच टीम को कोई सबूत नहीं मिल पाए.


कहा जाता है कि अंजना गावित मूल रूप से नासिक की रहने वाली थी. उन्हें एक ट्रक ड्राइवर से प्‍यार हुआ जिसके बाद उन्होंने उसे भागकर शादी कर ली. अंजना गावित को जब पहला बच्चा हुआ जो उनकी बेटी रेणुका थी, इसके बाद उनके पति ने उनको छोड़ दिया. इसके बाद अंजना सड़क पर आ गई. हालांकि इसके एक साल बाद उन्होंने एक रिटायर्ड सैनिक मोहन गावित से शादी रचाई. इस शादी में उन्हें दूसरी बेटी सीमा पैदा हुई. सीमा के पैदा होने के कुछ दिन बाद ही मोहन गावित ने अंजना को छोड़ दिया. कहा जाता है कि इसके बाद अंजना ने अपनी बच्चियों का पेट पालने के लिए चोरी की शुरूआत की.

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 1990 में रेणुका पुणे के एक मंदिर में कुछ चुराती हुई पकड़ी गई थी. रेणुका के सात उस दौरान एक नवजात बच्चा भी था.वजात बच्चे की आंड लेकर रेणुका भीड़ की सहानुभूति हासिल करने में सफल रही और वहां से बच निकली. कहा जाता है कि इसके बाद ही उसके दिमाग में बच्चा चोरी का ख्याल आया था. यह बात किसी को नहीं पता कि रेणुका के पास उस दौरान जो बच्चा था वो किसका था.

कहा जाता है कि इसके बाद इन तीनों महिलाओं ने छोटे-छोटे बच्चों का अपहरण करने का फैसला लिया. इन बच्चों के साथ वो चोरी करती थी और पकड़े जाने पर इनकी आड़ लेकर बच निकलती थी. इतना ही नहीं इन बच्चों से भीख मंगवाती थी. लेकिन जब बच्चे बड़े हो जाते और उनके काम के नहीं रहते को वो उन्हें पटक पटक पर मार देती थी.

मीडिया रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि एक बार रेणुका की बहन सीमा ने एक बार सात महीने के बच्चों को इसलिए जमीन पर पटक पटक कर मार दिया था क्योंकि वो उससे चुप नहीं हो पा रही थी. जबकि एक बार एक दो साल से बच्चों को उन्होंने पहले दिवार से मारा फिर उसकी भी जमीन पर पटक-पटक कर जान ले ली थी और उसके बाद उसे बच्चे के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर उसे एक थैले में भर कर कोल्हापुर के एक सिनेमा हॉल में पिक्चर देखने गई थी. पुलिस ने जब इन दोनों को साल 1996 में गिरफ्तार किया तब उन्होंने पुलिस को अपने जब कारनामे बताने शुरू किए तो वहां मौजूद पुलिस वाले भी हैरान रह गए थे.

अदालत में इन दोनों बहनों के वकील ने इनकी मां को मुख्य साजिशकर्ता बताया था. 29 जून 2001 को सेशन कोर्ट ने रेणुका शिंदे और सीमा गावित को 13 बच्चों के अपहरण और 6 बच्चों के कत्ल का दोषी पाया था और फांसी की सजा सुनाई. इसके बाद इन दोनों महिलाओं ने हाई कोर्ट का रूख किया. 31 अगस्त 2006 को हाई कोर्ट ने इन दोनों सीरियल किलर बहनों को फांसी की सजा सुनाई थी जिसके बार सुप्रीम कोर्ट ने भी इन महिलाओं की फांसी को बरकरार रखा था. वहीं इन दोनों ने राष्ट्रपति से दया याचिका की मांग की थी जिसे पूर्व राष्ट्रपति ने ठुकरा दिया था. अब यह दोनों महिलाएं अपनी फांसी की इतंजार कर रही है.

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First published: 14 January 2020, 15:24 IST
 
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