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ये है भारत का खूबसूरत आइलैंड, जहां कभी अंग्रेज करते थे बागियों को कैद

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 December 2019, 19:43 IST

Deserted Island India : दुनिया में तमाम आइलैंड यानी द्वीप है जो अपनी खुबसूरती की वजह से जाने जाते हैं. भारत का भी एक आइलैंड है जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह के पास स्थित है. इस आइलैंड को रॉस आइलैंड या नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड के नाम से भी जाना जाता है. बता दें कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित है जिसके 572 छोटे-छोटे द्वीप है. इनमें से केवल 38 पर ही लोग रहते हैं.

बाकी आज भी वीरान पड़े हैं. अंडमान निकोबार के द्वीप भारत के बजाय दक्षिण पूर्व एशिया से ज्यादा करीब हैं. अंडमान के द्वीप अपने खूबसूरत समुद्र तटों, क़ुदरती नजरों, अनछुए जंगलों, दुर्लभ समुद्री जीवों और मूंगे की चट्टानों के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं.

इतने खूबसूरत इस द्वीपों के पीछे कई दशक पुराना काला इतिहास छिपा हुआ है. अंडमान का एक द्वीप रॉस आइलैंड है जिसे अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड के नाम से जाना जाता है. ये आइलैंड साम्राज्यवादी इतिहास के काले-घने राज छुपाए हुए है. बता दें कि यहां उन्नीसवीं सदी के ब्रिटिश राज के खंडहर आज भी मौजूद है. रॉस आइलैंड में शानदार बंगलों, एक विशाल चर्च, बॉलरूम और एक कब्रिस्तान के खंडहर हैं, जिनकी हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है. यहां तेजी से जंगल बढ़ रहे हैं और पुरानी इमारतें अपना अस्तित्व खो रही हैं.

बता दें कि 1857 में भारत की आजादी के पहले संग्राम के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने बागियों को अंडमान के सुदूर द्वीपों पर लाकर कैद रखने की योजना बनाई. 1858 में 200 बागियों को लेकर एक जहाज अंडमान पहुंचा. उस वक्त सभी द्वीपों में घने जंगल हुआ करते थे. इंसान के लिए वहां रहना मुश्किल था. महज 0.3 वर्ग किलोमीटर के इलाके वाला रॉस आइलैंड इन कैदियों को रखने के लिए चुना गया पहला जजीरा था. इसकी वजह ये थी कि यहां पर पीने का पानी मौजूद था. लेकिन इस द्वीप के जंगलों को साफ करके इंसानों के रहने लायक बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं कैदियों के कंधों पर आ गई. इस दौरान ब्रिटिश अधिकारी जहाज पर ही रहा करते थे.

उसके बाद अंग्रेजों ने अंडमान में राजनैतिक कैदियों को लाकर रखना शुरू कर दिया. इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने रॉस आइलैंड को अंडमान का प्रशासनिक मुख्यालय बनाना शुरु किया. उसके बाद बड़े अफसरों और उनके परिवारों के रहने के लिए रॉस आइलैंड को काफी विकसित किया गया.

अंग्रेज अधिकारियों और उनके परिजनों को बीमारियों से बचाने के लिए रॉस आइलैंड में बेहद खूबसूरत इमारतें बनाई गईं. शानदार लॉन बनाए गए. बढ़िया फर्नीचर से बंगले आबाद किए गए. टेनिस कोर्ट का निर्माण किया गया. बाद में यहां एक चर्च और पानी साफ करने का प्लांट भी बनाया गया. इसके अलावा रॉस आइलैंड पर सेना के बैरक और एक अस्पताल भी बनाया गया.

बाद में डीजल जेनरेटर वाला एक पावरहाउस का भी निर्माण कराया गया. जिससे यहां रौशनी का इंतजाम किया जा सके. इन सुविधाओं की वजह से रॉस आइलैंड चारों तरफ बिखरे तबाही के मंजर के बीच चमकता सितारा बन गया. 1942 के बाद ये आइलैंड सुनसान हो गया. 1947 में भारत की आजादी के बाद अंडमान निकोबार भी भारत का हिस्सा बन गया. लेकिन भारत सरकार ने इसे उसके बाद अपने हाल पर छोड़ दिया. 1979 में भारतीय नौसेना ने इस द्वीप पर कब्जा कर लिया.

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First published: 27 December 2019, 19:43 IST
 
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