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100 दिन में 8 लाख लोगों का हुआ था कत्लेआम, लाखों औरतों को अपहरण कर बना दिया गया था सेक्स-स्लेव

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 July 2021, 14:55 IST
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Ajab Gajab News: इंसान ही जब इंसानियत का दुश्मन बन जाए और वहां की सरकार उसे कत्लेआम के लिए प्रेरित करे तो उसका परिणाम भीषण नरसंहार होता है. ऐसा ही एक नरसंहार 1990 के दशक में हुआ. इसमें 8 लाख से अधिक लोगों को निर्मम तरीके से मार दिया गया था. इसके अलावा लाखों औरतों को अपहरण कर सेक्स-स्लैब बनाकर रखा गया था.

कई लोगों की दूसरे समुदाय से आने वाले उनके पड़ोसियों, रिश्तेदारों ने हत्या कर दी थी. यहां तक कि कई लोगों ने अपनी पत्नियों की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी थी. यह सामूहिक वध पूर्वी अफ्रीकी स्थित देश रवांडा में हुआ था. यहां तुत्सी और हूतू समुदायों के बीच भयानक जनसंहार हुआ था. इसे तुत्सी के खिलाफ नरसंहार के रूप में भी जाना जाता है.

नरसंहार में हूतू जनजाति से जुड़े चरमपंथियों ने अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया था. रवांडा की कुल आबादी में हूतू समुदाय का हिस्सा 85 प्रतिशत है. इसके बाद भी लंबे समय तक तुत्सी अल्पसंख्यकों का देश पर दबदबा था. 6 अप्रैल 1994 की रात रवांडा के तत्कालीन राष्ट्रपति जुवेनल हाबयारिमाना और पड़ोसी बुरुंडी के राष्ट्रपति केपरियल नतारयामिरा एक विमान से जा रहे थे.

इस विमान को किगाली, रवांडा में गिराया गया था. विमान में सवार सभी लोग इसमें मारे गए थे. बता दें कि ये दोनों नेता हूतू समुदाय से आते थे. जहाज किसने गिराया था, इसका पुख्ता सबूत नहीं मिला था. लेकिन कुछ लोगों ने हूतू चरमपंथियों को इसके लिए जिम्मेदार माना था. जिससे कि नरसंहार का बहाना मिल सके. वहीं कुछ लोगों ने तुत्सी समर्थित रवांडा पैट्रिएक फ्रंट को इसका जिम्मेदार माना था.

इसके बाद हूतू कट्टरवादियों ने तुत्सी समर्थित रवांडा पैट्रिएक फ्रंट को जिम्मेदार बताकर अगले दिन 7 अप्रैल को कत्लेआम शुरू किया. उन्होंने अगले 100 दिनों तक अल्पसंख्यक तुत्सी समुदाय के लोगों की नृशंश हत्या की. हूतू चरमपंथियों ने 'आरटीएलएम' नाम का एक रेडियो स्टेशन स्थापित किया था, जिससे चरमपंथियों को निर्देश देते हुए घोषणा की गई थी कि 'तिलचट्टों को साफ़ करो'.

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First published: 19 July 2021, 14:55 IST
 
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