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कभी पृथ्वी पर पाए जाते थे विशालकाय मगरमच्छ, जो डायनासोर का करते थे शिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 April 2020, 15:11 IST

Sarcosuchus Crocodile: करोड़ो साल पहले जब पृथ्वी (Earth) की उत्पत्ति हुई थी, उसके बाद धीरे-धीरे यहां जीव-जन्तुओं (Fauna) का विकास होने लगा, लेकिन कालांतर में करोड़ों तरह के जीव जन्तुओं की प्रजातियां समाप्त हो गई. जिनके अवशेष आज भी मिलते हैं इन्हीं में से एक है डायनासोर (Dinosaur). आपने डायनासोर के बारे में तो सुना होगा कि ये दुनिया के सबसे बड़े जानवर हुआ करते थे, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे जानवर (Animal) के बारे में बताने जा रहे है जो डायनासोर का भी शिकार कर लिया करते थे.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े मगरमच्छ (Crocodile) के बारे में जो डायनासोर को खा जाया करते थे. इस बात का अंदाजा वर्तमान में जगह-जगह मिलने वाले इनके अवशेषों से लगाया जा सकता है. ये खतरनाक मगरमच्छ डायनासोर को एक बार में ही मारकर खा जाया करते थे.


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मगरमच्छों की इस विशालकाय प्रजाति का नाम सारकोसुकस (Sarcosuchus) था. ये आज के मगरमच्छों की तुलना में कई गुना अधिक भारी और बड़े होते थे. इनकी लंबाई 9.5 मीटर यानी 31 फीट के आसपास हुआ करती थी, जबकि इनका वजन चार टन के करीब यानी करीब 3600 किलो से भी ज्यादा हुआ करता था.

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शोधकर्ता मानते हैं कि इन विशालकाय मगरमच्छों की आंखें दूरबीन जैसी होती थीं और वो रात के अंधेरे में भी अपने शिकार को आसानी से देख सकते थे. इनके ऊपर के जबड़े में 35 दांत होते थे और नीचे का जबड़े में 31 दांत पाए जाते थे. माना जाता है कि अपने विशालकाय मगरमच्छ अपने जबड़े में दबाकर इंसान की 100 से ज्यादा हड्डियों को एक साथ तोड़ देता था.

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, सारकोसुकस कम उम्र में तो मछलियों को अपना शिकार बनाते थे, लेकिन बड़े हो जाने के बाद खतरनाक और विशालकाय डायनासोर को खाकर अपना पेट भरा करा करते थे.

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शोधकर्ताओं का कहना है कि पूरी तरह विकसित हो जाने के बाद ये मगरमच्छ किसी बड़े थेरोपॉड डायनासोर की भी गर्दन तोड़ने की क्षमता रखते थे. बता दें कि 1950 के दशक में इस विशालकाय मगरमच्छ के बारे में पहली बार इंसानों को तब पता चला, जब अल्बर्ट फिलिक्स नाम के एक फ्रेंच शोधकर्ता को सहारा के रेगिस्तान इस मगरमच्छ के सिर और दांत जैसे कई नमूने मिले. इसके बाद यह माना गया कि ये विशालकाय जीव उत्तरी अफ्रीका के घने जंगलों में रहा करते थे जो धीरे-धीरे रेगिस्तान बन गया जिसे वर्तमान में सहारा रेगिस्तान के नाम से जाना जाता है.

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First published: 22 April 2020, 15:09 IST
 
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