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खुद को सांप से कटवाकर और फिर की रिसर्च, इस महान वैज्ञानिक ने लिखी थी मरने से पहले मौत की कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 August 2021, 9:58 IST

क्या आप सोच सकते हैं कि कोई वैज्ञानिक अपनी रिसर्च के लिए अपनी जान भी गंवा सकता हैअगर नहीं तो चलिए आज हम आपको एक ऐसी ही सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहे हैंजो एक वैज्ञानिक की हैजिसमें उसने अपनी रिसर्च के लिए जान गंवा दीये कहानी है वैज्ञानिक कार्ल पैटरसन शिमिट कीजिन्होंने सांप के जहर से होने वाली मौतों के अध्ययन के लिए अपनी जान गंवा दीशिमिट जानना चाहते थे कि सांप के काटने के बाद इंसान को कैसा महसूस होता है और उसका जहर इंसान के शरीर में कैसे फैलता है.

इसी के लिए कार्ल पैटरसन शिमिट अपनी जान पर खेल गएबात साल 1957 के सितंबर महीने की हैअमरीका के शिकागो प्रांत के लिंकन पार्क चिड़ियाघर में काम करने वाले एक शख्स को एक अजीबोगरीब सांप मिलाइस सांप की लंबाई 76 सेंटीमीटर थीइस सांप की प्रजाति जानने के लिए वो उसे शिकागो के नैचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ले गयावहां उसकी मुलाकात मशहूर वैज्ञानिक कार्ल पैटरसन शिमिट से हुई.


शिमिट को सरीसृप विज्ञान का एक बड़ा जानकार माना जाता थाशिमिट ने देखा कि इस सांप के शरीर पर बहुरंगी आकृतियां हैंवह सांप की प्रजाति का पता लगाने को तैयार हो गएइसके बाद 25 सितंबर को उन्होंने इसकी पड़ताल शुरु कीइस दौरान उन्होंने पाया कि ये अफ्रीकी देशों में पाया जाने वाला एक सांप है.

इस सांप का सिर बूमस्लैंग सांपों जैसा था जो कि सब-सहारन अफ्रीका के जंगलों में पाए जाते हैंलेकिन शिमिट अपनी इस पड़ताल को लेकर आश्वस्त नहीं थेअपने जर्नल में इस पड़ताल के बारे में लिखते हुए शिमिट बताते हैं कि उन्हें इस सांप के बूमस्लैंग होने पर शक हैक्योंकि इस सांप की एनल प्लेट बंटी हुई नहीं थींलेकिन इस शक को दूर करने के लिए शिमिट कुछ अलग करना चाहते थेजिसके लिए उन्हें अपनी जान से हाथ गंवानी पड़ा.

इसके लिए शिमिट सांप को अपने काफी करीब लाकर उसके शरीर पर बनी आकृतियों का अध्ययन करने लगेवह अचंभे के साथ सांप के शरीर और सिर पर बनी आकृतियां और रंग देख रहे थेतभी सांप ने उनके अंगूठे पर काट लियासांप के काटने के बाद शिमिट ने डॉक्टर के पास जाना उचित नहीं समझावो ये जानना चाहते थे कि सांप के काटने के बाद इंसान को आखिर कैसा महसूस होता है.

इसीलिए वो अपने अंगूठे को चूसकर सांप का जहर बाहर निकालने की कोशिश करने लगेयही नहींउन्होंने अपने जर्नल में सांप के कांटने के बाद हो रहे अनुभवों को दर्ज करना शुरू कर दियाअपने जर्नल में शिमिट लिखते हैं, “4:30 से 5:30 तक जी मिचलाने जैसा अनुभव हुआ लेकिन उल्टी नहीं आईमैंने होमवुड तक एक ट्रेन में यात्रा की.

उसके बाद 5:30 से 6:30 तक काफी ठंड और झटके लगने जैसी अनुभूति हुई जिसके बाद 101.7 डिग्री का बुखार आयाफिर शाम 5:30 बजे ही मसूड़ों में खून आना शुरू हो गयाशिमिट आगे लिखते हैं, “8:30 बजे मैंने दो टोस्ट खाएफिर रात 9:00 से 12:20 तक मैं आराम से सोयाइसके बाद मैंने पेशाब किया जिसमें ज्यादातर मात्रा खून की थी.”

शिमिट आगे लिखते हैं कि, "इसके बाद 26 सितंबर की सुबह 4:30 बजे मैंने एक गिलास पानी पिया और जी मिचलाने की वजह से उल्टी कीजो कुछ नहीं पच पाया थामेरे पेट से बाहर निकल गयाइसके बाद मैंने काफी बेहतर महसूस किया और सुबह साढ़े छह बजे तक सोयाशिमिट के आगे लिखा, "सुबह साढ़े छह बजे मेरे शरीर का तापमान 98.2 डिग्री सेल्सियस थामैंने टोस्ट के साथ उबले अंडेऐपल सॉससेरिअल्स और कॉफी पीइसके बाद पेशाब नहीं आईबल्कि हर तीन घंटे पर एक आउंस खून निकलामुंह और नाक से खून निकलना लगातार जारी रहालेकिन ज्यादा मात्रा में नहीं.”

इसके बाद दोपहर के डेढ़ बजे शिमिट ने अपनी पत्नी को फोन कियालेकिन जब तक डॉक्टर पहुंचे तब तक शिमिट का पूरा शरीर पसीने में डूब चुका थावह बेहोशी की स्थिति में थेअस्पताल पहुंचने तक एक डॉक्टर ने उन्हें होश में लाने की काफी कोशिश कीलेकिन दोपहर तीन बजे डॉक्टरों ने शिमिट को मृत घोषित कर दिया.

डॉक्टरों ने बताया कि सांस लेने में तकलीफ की वजह से शिमिट की मौत हुई थीबता दें कि अफ्रीकी सांप बूमस्लैंग का जहर बड़ी तेजी से असर करता हैकिसी पक्षी की जान लेने के लिए इसका 0.0006 मिलीग्राम जहर ही काफी हैइस जहर के प्रभाव से शरीर में खून के थक्के जमना शुरू हो जाते हैंजिससे खून का प्रवाह बाधित हो जाता हैइसके बाद शरीर में अलग-अलग जगहों से खून निकलना शुरू हो जाता है और फिर पीड़ित की मौत हो जाती है.

शिमिट की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कहती है कि उनके फेफड़ोंआंखोंदिलकिडनियों और दिमाग से खून बह रहा था. 'शिकागो ट्रिब्यूनमें इस मामले पर छपी खबर में दावा किया गया था कि शिमिट की मौत से पहले उन्हें डॉक्टर के पास जाने को कहा गया थालेकिन उन्होंने इससे इंकार करते हुए कहा कि इससे लक्षणों पर असर पड़ सकता है.

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कुछ लोग मानते हैं कि शिमिट की जिज्ञासा ने उनकी जान ले लीहालांकिकुछ लोग ये मानते हैं कि शिमिट इतने प्रतिष्ठित वैज्ञानिक थे कि वह जानते थे कि इस जहर को बेअसर करने वाली दवा सिर्फ अफ्रीका में उपलब्ध थीऐसे में उन्होंने अपनी मौत को स्वीकार कर लिया थापब्लिक रेडियो इंटरनेशनल के साइंस फ्राइडे प्रोग्राम को पेश करने वाली टॉम मेकनामारा कहती हैं कि शिमिट अपनी मौत को सामने देखकर जरा भी हिचके नहीं बल्कि एक अंजान रास्ते पर बढ़ गए.

https://www.youtube.com/watch?v=9hUptrsfDlc&t=3s

First published: 14 August 2021, 9:58 IST
 
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