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वो डकैत जो हत्या करने के बाद कट लेता था उंगलियां, पकड़ने के लिए बाहर से आया था अंग्रेज

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 July 2020, 17:21 IST

आपने आज तक ऐसे कई डकैत और अपराधियों के बारे में सुना होगा जो अमीरों से उनका धन लूटकर गरीबों में लुटा देता था. भारत में भी ऐसे ही कई डकैत और अपराधी हुए हैं और वो ऐसा करके जनसर्थन हासिल करते हैं ताकि जनता उनकी मदद कर सके. 20 सदी के दूसरे दशक में एक डकैत ने अंग्रेजी अफसरों की नाक में दम कर रखा था, उसका खौफ इतना था कि उसके पकड़ने के लिए अंग्रेजों को विदेश से एक अधिकारी बुलाना पड़ा था.

सुल्ताना डाकू अंग्रेजों का पैसा लूटता और उसे गरीबों में बाट देता था. कहा जाता है कि सुल्ताना डाकू शुरूआत में छोटी मोटी चोरी करता था, और एक बार पुुलिस मुठभेड़ के दौरान उसे जफर उमर नाम पुलिस अधिकारी ने गिरफ्तार किया था जिसके लिए उन्हें पांच हजार रूपये का ईनाम मिला था. सुल्ताना डाकू को जब पहली बार गिरफ्तार किया गया था को उसे चार साल की जेल हुई थी, क्योंकि तब तक उस पर हत्या का कोई मुकदमा नहीं था.

कहा जाता है कि जेल से रिहा होने के बाद सुल्ताना डाकू ने नजीबाबाद और साहिनपुर में रह रहे लोगों को इक्ठा दिया और अपना गिरोह दोबारा से शुरू किया. बताया जाता है कि उसकी गैंग में 100 डाकू हुआ करते थे और उनके निशाने में ज्यातार अंग्रेज और वो अमीर रहते थे जो गरीबों पर अत्याचार करते. सुल्ताना डाकू जाल विछाकर डकैती करता था और वो काफी सावधानी भी बरतता था, इसकी कारण वो सफल होता और जो माल वो लूटता आस पास के गांव वालों में बांट देता था.

सुल्ताना डाकू के बारे में कहा जाता कि वो डकैती के दौरान कम से कम खून बहाने पर विश्वास करता था, वो किसी को तब तक नहीं मारता था, जब तक कोई विरोध नहीं करता या फिर उसके साथियों को मारने की कोशिश ना करता था. सुल्ताना डाकू के बारे में एक बात और मशूहर है कि वो जिन लोगों को मारता उन्हें मारने के बाद उनके हाथ की तीन उंगलिया काट लेता था.


दूसरी तरफ भारत में मौजूद अंग्रेजी हुकूमत सुल्ताना डाकू के कारनामों से परेशान हो चुकी थी. अंग्रजों ने सुल्ताना डाकू को पकड़ने के लिए 300 जवानों की एक टीम भी बनाई थी, जिसमें 50 घुड़सवार थे, और टीम के सभी लोगों के पास आधुनिक हथियार थे, लेकिन सुल्ताना डाकू इन लोगों की पकड़ में कभी नहीं आया. जब अंग्रेज सुल्ताना डाकू को पकड़ नहीं पाए तो फ्रैडी यंग नामक अधिकारी को ब्रिटेन से बुलाया गया.

फ्रैडी यंग ने भारत पहुंचने के बाद सुल्ताना डाकू की सभी वारदातों को काफी अध्ययन किया और वो इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सुल्ताना डाकू को उसके मुखबिरों से कारण इतनी सफलता मिलती है और इसके मुखबिर पुलिस में भी है. इसके बाद मनोहर लाल नामक पुलिस अधिकारी का एक दूर दराज के इलाके में ट्रांसफर हुआ, दावा किया जाता है कि वहीं सुल्ताना डाकू को जानकारी देता था. फ्रैडी यंग ने इसके बाद सुल्ताना के सभी करीबियों को अपने साथ मिलाया और काफी कोशिशों के बाद उसे पकड़ लिया. फ्रैडी यंग को सुल्ताना को पकड़ने के लिए भोपाल का आईजी बनाया गया था.

सुल्ताना डाकू को गिरफ्तार करके आगरा लेकर जाया गया जहां उस पर मुकदमा चला और 13 लोगों को फांसी की सजा दी गई, जबकि कुछ लोगों को काला पानी और कुछ लोगों को उम्रकैद की सजा हुई. कहा जाता कि आखिरकार 7 जुलाई 1924 को आगरा की जेल में सुल्ताना डाकू को फांसी फांसी पर लटका दिया गया.सुल्ताना डाकू के कई मामलों में इतिहासकारों की राय एक नहीं है, इसीलिए फांसी की तारीख, कितने लोगों को फांसी हुई इसमें अंतर है.

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First published: 9 July 2020, 15:00 IST
 
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